पटनाः बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ा उलटफेर करते हुए जन सुराज के प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज कर ली है.
वोटों की गिनती के दौरान प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए रखे.
इस सीट पर प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले हैं. दूसरे स्थान पर बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार हैं जिन्हें 44827 वोट मिले हैं. यानी प्रशांत किशोर 19,324 मतों से आगे रहे हैं.
यहां आरजेडी की रेखा कुमारी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. उन्हें सिर्फ 14273 वोट मिले हैं.
बांकीपुर में हुए उपचुनाव में क़रीब 35 फ़ीसदी वोटिंग हुई थी.
बीजेपी के गढ़ में जन सुराज का झंडा
बांकीपुर सीट पटना के शहरी इलाक़े में मौजूद है और इसे बीजेपी का मज़बूत गढ़ माना जाता है. इस सीट से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन विधायक थे.
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नबीन के इस्तीफे से बांकीपुर की सीट खाली हुई थी. यहां कुल 25 उम्मीदवार मैदान में थे.
बीजेपी उम्मीदवार की जीत के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत बिहार में एनडीए के कई दिग्गजों और सरकार के मंत्रियों ने प्रचार किया था. पूर्व मुख्य़मंत्री नीतीश कुमार ने भी बीजेपी उम्मीदवार को वोट देने की अपील की थी.
जश्न का माहौल
प्रशांत किशोर की जीत पर जन सुराज में जश्न का माहौल है. दरअसल साल 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में अकेले दम पर प्रशांत किशोर ने 238 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे. लेकिन जन सुराज के किसी उम्मीदवार को जीत नहीं मिली. हालांकि प्रशांत किशोर 2025 के चुनाव में खुद चुनाव नहीं लड़े थे.
तब उन्होंने कहा था कि ‘यह उनकी पार्टी का फ़ैसला था कि बाकी सीटों पर ध्यान देना ज़रूरी है.’
इधर बांकीपुर से उपचुनाव लड़ने की घोषणा के बाद उन्होंने कहा था, “मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की ज़िम्मेदारी को उसी लक्ष्य की तरफ एक कदम मानता हूं. नवंबर 2025 में हज़ारों और लाखों लोग जन सुराज के विचारों और प्रयासों से जुड़े थे. अगर हम जीते तो इससे न सिर्फ़ यह आंदोलन मज़बूत होगा, बल्कि बिहार में बदलाव की सोच को भी नई ताक़त मिलेगी.”
इससे पहले पांच जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की घोषणा की थी. जिसके बाद यह यह हाई प्रोफ़ाइल मुक़ाबले में बदल गई.
जन सुराज ने उपचुनाव की घोषणा के साथ ही सभी समीकरणों को साधने की रणनीति के साथ मैदान में उतरी. खुद प्रशांत किशोर ने प्रचार में जमकर पसीना बहाया और पूरे चुनाव में सीएम सम्राट चौधरी को निशाने पर लिये रखा.
पीके बोले, बांकीपुर की जनता की जीत
अपनी जीत पर प्रशांत किशोर ने इसे बांकीपुर की जीत बताया है. उन्होंने मीडिया से बात में अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, “चुनाव प्रचार के दौरान हमलोगों ने बात रखी थी. ये विधायक बनाने का चुनाव नहीं था. ये बीजेपी को संदेश देने का चुनाव था, जिसमें अच्छे लोग को मुख्यमंत्री बनाना था. हमलोग का एक मात्र उद्देश्य है कि बिहार का बेहतरी हो. जितनी चिंता मोदी जी को गुजरात की है, उतनी ही चिंता बिहार की करें, ताकि कोई बच्चा बिहार से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करे.”
नौ महीने में ही बदल गए सीन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बांकीपुर सीट पर बीजेपी के नितिन नबीन ने 98 हजार से ज्यादा वोट लेकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी आठ हजार वोट भी नहीं जुटा सकी थीं.
अब प्रशांत किशोर की जीत और बीजेपी का अपने ही गढ़ में हार जाने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं कि आखिर नौ महीने के अंदर ऐसे कौन से समीकरण बदले और बीजेपी कहां चूक कर गई प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरे और बीजेपी के किले में सेंध लगा दी.
इस सीट पर बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने अंतिम समय में पारिवारिक कारण बताते हुए 10 जुलाई को अपना नामांकन वापस ले लिया था. इससे पहले उन्होंने अपना पर्चा दाखिल कर दिया था.
इसके बाद बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा.

नितिन नबीन ने विरासत को आगे बढ़ाया
1995 के विधानसभा चुनाव से इस सीट की राजनीति पूरी तरह बदल गई. भाजपा के नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के चुनाव भी लगातार जीते. इस तरह पटना पश्चिम भाजपा का मजबूत गढ़ बन गई.
2006 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे नितिन नबीन पहली बार विधायक बने.
2008 में सीट का नाम बदलकर बांकीपुर हो गया, लेकिन भाजपा की जीत का सिलसिला जारी रहा. नितिन नबीन ने लगातार 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव भी जीत कर अपना सिक्का जमाया. 2025 में उन्हें 63 प्रतिशत वोट मिले और उन्होंने राजद उम्मीदवार को 51 हजार से ज्यादा वोटों से हराया.
कब्जे से निकली सीट
लेकिन नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट बीजेपी के कब्जे से एक झटके में निकल गई. प्रशांत किशोर की जीत से जन सुराज को बिहार की राजनीति में न सिर्फ जगह मिली है, बल्कि भविष्य की राजनीति में भी जनसुराज के लिए राह खुलती नजर आ रही है. वह इसलिए भी राजद ने बांकीपुर उपचुनाव में अपना जनाधार पहले की तुलना में खोया है.
