रांचीः झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि केंद्र में मोदी की सरकार नहीं बल्कि “भारतीय गबन पार्टी”की सरकार चल रही है. मोदी के सत्ता में आने के बाद से देश में घोटालों और गबन की एक लंबी सीरीज सामने आई है.
एक प्रेस कांफ्रेंस में जेएमएम नेता ने कथित तौर पर 24 गबन के मामलों में से कुछ मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की.
उन्होंने कथित नोटबंदी के माध्यम से करेंसी गबन, पीएसयू गबन, बैंक गबन, समुद्र गबन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने का आरोप लगाया.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आकाश गबन भी हुआ, जिसके तहत एयरपोर्ट्स को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हाथों से लेकर जीएमआर और अडानी जैसे लोगों को दे दिया गया. फिर हुआ पहाड़ गबन, उत्तराखंड से लेकर अरावली तक. और अब मंदिर गबन शुरू हुआ. चाहे काशी हो, मथुरा हो, या अयोध्या, आज तक हिंदुस्तान ने कभी नहीं देखा कि मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे से कोई चीज़ चोरी हुई हो. लेकिन अयोध्या के श्रीराम मंदिर से अरबों रुपए की चोरी हो गयी.
बीजेपी का पलटवार
भाजपा प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने सुप्रियो भट्टाचार्य द्वारा केंद्र सरकार के 12 साल के कार्यकाल में 24 गबन गिनाने पर करारा पलटवार किया है.
उन्होंने कहा कि जेएमएम और उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस व राजद अगर गबन और घोटालों पर दूसरों को उपदेश दे तो यह हास्यास्पद नहीं तो क्या है, जो पार्टियां खुद गबन एवं घोटाले की जनक हो. उनकी सहयोगी दलों का राजनीतिक इतिहास भी घपले घोटालों से भरा पड़ा है. चंद करोड़ रुपए के लिए किस पार्टी ने अलग राज्य आंदोलन को बेचने का काम किया, यह किसी से छिपा है क्या ?
साथ ही उन्होंने भाजपा को भारतीय गबन पार्टी बताने पर कहा कि जेएमएम को पहले अपने गिरेबान और राजनीतिक अतीत में झांकने की ज़रूरत है। भाजपा क्या है, यह प्रमाण पत्र एक लुटेरी पार्टी से लेने की जरूरत नहीं है. जेएमएम का असली मतलब जमकर मुद्रा मोचन पार्टी है.
बाउरी ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अपने 12 साल के कार्यकाल में जो स्वर्णिम अध्याय लिखा गया है वह जेएमएम और उनकी सहयोगी दलों को कभी दिख नहीं सकता है। उसका भी प्रमाण पत्र भाजपा को इन विकास विरोधी एवं परिवारवादी दलों से नहीं चाहिए।
बाउरी ने कहा कि जेएमएम को केंद्र की फिक्र छोड़ पहले अपने वादों के बारे में जनता को बतानी चाहिए। हर साल 5 लाख नौकरी का क्या हुआ, झारखंड में पेपर लीक पर इनकी जुबान क्यों नहीं खुलती.
