केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के यू-डायस का रिपोर्ट जारी कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 9,827 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं. इन स्कूलों में 4,40,346 विद्यार्थी नामांकित हैं. इनमें अधिकांश प्राथमिक विद्यालय हैं.
इसके साथ ही, एक शिक्षक वाले विद्यालयों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. राज्य में पिछले दो वर्षों में ऐसे विद्यालयों की संख्या में लगभग दो हजार की बढ़ोतरी हुई है.
12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति
राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पिछले दो वर्षों में लगभग 12 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. इसके बावजूद एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या बढ़ रही है.
राज्य में औसतन जितने शिक्षकों की नियुक्ति हो रही है, उससे अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसका प्रमुख कारण यह है कि सेवानिवृत्त होने वाले पारा शिक्षकों के स्थान पर नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है. राज्य में शिक्षकों के लगभग 50 हजार पद रिक्त हैं.
सवा सौ स्कूलों में बच्चे नहीं
झारखंड राज्य में 125 ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है. विद्यालयों में भले ही एक भी विद्यार्थी नामांकित न हो, लेकिन 43 शिक्षकों की पदस्थापना है.
इन शिक्षकों के वेतन पर सरकार प्रति माह लगभग 15 लाख रुपये से अधिक खर्च कर रही है. राज्य में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में ऐसे विद्यालयों की संख्या 107 थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 125 हो गई है.
शून्य नामांकन वाले स्कूलों के संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पिछले वर्ष सभी जिलों को पत्र लिखा था. ऐसे विद्यालयों की आवश्यकता का आकलन करते हुए उनके संचालन को लेकर निर्णय लेने को कहा गया था.
