केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के यू-डायस का रिपोर्ट जारी कर दिया है. राज्य में हाईस्कूल स्तर पर विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक है. राज्य में 6.6 फीसदी विद्यार्थी हाईस्कूल स्तर पर विद्यालय छोड़ देते हैं. हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर यह आकड़ा 9.5 फीसदी का है.
राज्य में प्लस टू स्तर पर छात्र शिक्षक अनुपात बढ़ा है. वर्ष 2024-25 में प्लस टू स्तर पर 47 विद्यार्थी पर एक शिक्षक कार्यरत थे यह बढ़कर अब 52 हो गया है.
रिपोर्ट बताती है कि झारखंड में प्राथमिक से लेकर प्लस टू विद्यालय तक में विद्यार्थियों के ड्रापआउट दर में वृद्धि हुई है. हलांकि, इसके बाद भी राष्ट्रीय औसत में झारखंड की स्थिति काफी बेहतर है. और राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2024-25 की तुलना में इस वर्ष माध्यमिक स्तर पर ड्रापआउट दर में सुधार हुआ है.
राष्ट्रीय स्तर पर पिछले वर्ष हाईस्कूल स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 11.5 फीसदी थी. इसमें लगभग दो फीसदी की कमी आई है.
वहीं, झारखंड में यह आकड़ा 3.50 फीसदी से बढ़कर 6.6 फीसदी हो गया है. मध्य विद्यालय स्तर पर भी राज्य में ड्रापपाउट रेट 1.70 से बढ़कर 2.50 हो गया है.
राज्य में एक स्कूल में औसतन 169 बच्चे
रिपोर्ट के अनुसार राज्य के स्कूलों में औसतन 169 बच्चे नामांकित है. यह राष्ट्रीय औसत के बराबर है. राष्ट्रीय स्तर पर भी एक विद्यालय में 169 बच्चे नामांकित है.
राज्य में ऑवरऑल छात्र शिक्षक अनुपात में कोई बदलाव नहीं हुआ है. प्राथमिक से लेकर प्लस टू स्तर तक मिलाकर राज्य में 36 विद्यार्थी पर एक शिक्षक कार्यरत हैं. जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या 24 है. प्राथमिक व मध्य विद्यालय में छात्र शिक्षक अनुपात में पूर्व की तुलना में सुधार हुआ है.
