झारखंड में नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की कोयला खदानों का ब्योरा देते हुए केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बताया कि पकरी-बरवाडीह, चट्टी-बरियातू और केरंदरी कोयला खनन गतिविधियों के कारण कुल 4,800 परिवार विस्थापित हुए. एनटीपीसी द्वारा संचालित इन परियोजनाओं के प्रभावितों के बीच कुल 520.80 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है.
राज्यसभा में परिमल नथवाणी द्वारा झारखंड में विस्थापन, पुनर्वास योजनाओं और मुआवजे से जुड़े पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी दी है.
उन्होंने बताया कि पचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट और एनएलसीआइएल 86 परियोजना प्रभावित परिवारों को आवास के बदले आर्थिक मुआवजा दिया है, जबकि पांच प्रभावित परिवारों को रोजगार के विकल्प के रूप में एकमुश्त मुआवजा प्रदान किया गया है.
5 सालों में 6591 परिवारों का पुनर्वास
मंत्री ने सांसद के सवाल पर जानकारी दी कि झारखंड में सार्वजनिक क्षेत्र की विभिन्न कोयला कंपनियों द्वारा पिछले पांच वर्षों के दौरान खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए 6591 परिवारों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया गया है. इस अवधि में प्रभावित परिवारों को भूमि, संपत्ति और पुनर्वास मद में कुल 1108 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि वितरित की गई है.
सहायक कंपनियों ने 1791 परिवारों को बसाया
राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री ने कोल इंडिया लिमिटेड (साआइएल)) की सहायक कंपनियों के योगदान की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (इसीएल) और एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीएल) ने मिलकर कुल 1791 परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया है. इन कंपनियों ने पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था तथा भूमि और संपत्ति मुआवजे के रूप में 587 करोड़ रुपये वितरित किए हैं.
रोजगार के मामले में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि सीसीएल ने 968 और ईसीएल ने 174 पात्र प्रभावितों को नौकरियां प्रदान की हैं.
