रांचीः झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ने स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL )-2023 के जरिए विभिन्न विभागों में नियुक्त सरकारी सेवकों ने शनिवार को अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए सफाई दी और कहा कि जो परीक्षा में गड़बड़ी और कथित तौर पर पैसे देकर नौकरी लेने के आरोपों से वे आहत हैं. जिन्होंने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है, उनके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन सभी को एक तराजू में तौलना
ठीक नहीं.
रांची में एक प्रेस कांफ्रेंस में कई सरकारी सेवकों ने कहा, “उन्होंने वर्षों की मेहनत और प्रतियोगी परीक्षा के बाद नौकरी हासिल की है. उन पर पैसे देकर नौकरी पाने का आरोप लगाना न सिर्फ निराधार है, बल्कि इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हो रही है. वे किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने सीआईडी या किसी अन्य जांच एजेंसी से जांच कराने पर भी सहमति जताई, लेकिन मांग की कि जांच किसी पूर्वाग्रह या भीड़ के दबाव में नहीं होनी चाहिए.”
2016 से शुरू हुई पूरी प्रक्रिया, लंबा इंतजार
अभ्यर्थियों ने कहा कि नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी. इसमें करीब तीन लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी. 26 हजार अभ्यर्थी सफल हुए और अंतिम चरण में करीब दो हजार अभ्यर्थियों का चयन हुआ. सभी सरकार के अलग-अलग विभागों में कार्यरत है. उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें लंबे समय तक इंतजार और संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने कहा कि यह नौकरी उन्हें किसी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि वर्षों की तैयारी और परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर मिली है.
600 से ज्यादा आदिवासी सफल हुए
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एएसओ के पद पर चयनित चंद्रो हेंब्रम ने बताया कि वे कोल्हान के एक आदिवासी परिवार से आते हैं और चाईबासा के रहने वाले हैं. उनके पिता की मौत पेड़ से गिरने के कारण हुई थी और संघर्ष करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई और करियर बनाया. उन्होंने कहा, “मैं कहां से 35 लाख रुपये दूंगा?
पेयजल एवं स्वास्थ्य विभाग में एएसओ के पद पर कार्यरत जयदीप ने दावा किया कि चयनित अभ्यर्थियों में 600 से अधिक आदिवासी छात्र शामिल हैं. उनका यह भी कहना है कि करीब 96 फीसदी चयनित अभ्यर्थी झारखंड के मूलवासी और झारखंडी हैं. कई चयनित उम्मीदवार पहले से दूसरी नौकरियों में काम कर रहे थे और बेहतर अवसर की तलाश में इस परीक्षा में शामिल हुए थे. उन्होंने कहा, “हम 35 लाख रुपये देकर नौकरी पाने वाले लोग नहीं हैं. हम पर पैसे देकर नौकरी पाने का आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है.”
एएसओअनिल रजक ने कहा कि लगातार लग रहे आरोपों के कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अब समाज में उन्हें शक की नजर से देखा जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी, गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले चयनित अभ्यर्थियों के पक्ष को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखा जा रहा है.
‘कोर्ट के आदेश के बाद हुई ज्वाइनिंग’
अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति और ज्वाइनिंग को लेकर कहा कि उनकी ज्वाइनिंग न्यायालय के आदेशों के बाद हुई है. उन्होंने कहा कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है. अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन और भीड़ के दबाव के आधार पर उनकी छवि खराब नहीं की जानी चाहिए.
सरकार ने रद्द किया, फिलहाल हाईकोर्ट से राहत
गौरतलब है कि जेपीएससी तथा जेएसएससी सीजीएल में गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों के आंदोलन के दौरान सरकार ने कई परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द कर दी थी. इसमें सीजीएल भी शामिल है. सरकार के फैसले के बाद 1932 अभ्यर्थियों की सरकारी सेवा समाप्त कर दी गई थी.
इस बीच झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 के जरिए विभिन्न विभागों में नियुक्त 1340 सरकारी सेवकों को बड़ी राहत दी है.
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने CGL-2023 का विज्ञापन (विज्ञापन संख्या 10/2023) रद्द करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. अदालत ने इन सरकारी सेवकों को फिलहाल काम जारी रखने का निर्देश दिया है.
हाईकोर्काट के आदेश के आलोक में कार्मिक विभाग ने गुरुवार देर शाम आदेश जारी कर सभी प्रभावित कर्मियों से पूर्व की तरह काम लेते रहने का निर्देश दिया है.
