रांचीः खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चरणबद्ध आंदोलन का खाका तैयार कर लिया है. आंदोलन के पहले चरण में 7 सितंबर को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा.
पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने पार्टी के सभी जिला अध्यक्षों, सचिवों और संयोजकों को पत्र भेजा है.
महासचिव ने बताया है कि धरना के माध्यम से जेएमएम के कार्यकर्ता संसद में पारित इस विधेयक के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए एमएमडीआर बिल को वापस लेने की मांग करेंगे.
उन्होंने कहा है कि इसके बाद जिला स्तर पर आंदोलन किया जाएगा. पार्टी इस विधेयक के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन के लिए तैयार है. इसमें आर्थिक नाकेबंदी भी की जा सकती है.
विनोद पांडेय ने कहा कि इस महीने जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत जिलों में कार्यकर्ताओं की बैठकें की जा रही हैं. कानून से झारखंड को होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है. साथ ही झारखंड के हक—धिकार पर हमले के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई की मुनादी की जा रही है. सात सितंबर के बाद से आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत होगी.
आंदोलन के तीसरे चरण में जेएमएम कार्यकर्ता राजभवन के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे. बिल को लेकर झारखंड की आपत्तियों को राज्यपाल के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा.
गौरतलब है कि जेएमएम के अध्यक्ष और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही इसे काला कानून करार दिया है और हुंकार भरी है कि अगर केंद्र सरकार ने यह काला बिल वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा.
20 अगस्त को रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक में भी इस कानून के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है.
