झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का शनिवार देर रात निधन हो गया.
देर रात गिरिडीह में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. वे 57 साल के थे.
उनके निधन की खबर से सरकार और राजनीति में शोक की लहर है. उनका अंतिम दाह संस्कार गिरिडीह में होगा. अस्पताल से पार्थिव शरीर को घर पर लाया गया है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई मंत्री, राजनेता उन्हें श्रद्धांजलि देने गिरिडीह पहुंच रहे हैं.
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू अपने पीछे पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं.
क्या बताया डॉक्टर ने
मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन पर मर्सी अस्पताल के डॉ. शहजाद शेख ने बताया कि उन्हें करीब 2:15 बजे अस्पताल लाया गया था. मरीज को पिछले दो घंटे से सीने में दर्द हो रहा था.
उन्होंने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज को उल्टी हुई थी और उल्टी का कुछ हिस्सा फेफड़ों में चला गया था. अस्पताल पहुंचते ही उन्हें तत्काल इंट्यूबेट किया गया. ईसीजी जांच में हार्ट अटैक के संकेत मिले थे.
डॉ शेख के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के करीब 10 से 15 मिनट बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई और वह अचानक गिर पड़े. इसके बाद तुरंत सीपीआर शुरू किया गया.सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाएं और जीवन बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया है कि उन्हें करीब सवा दो बजे रात में भर्ती कराया गया था. चिकित्सकीय जांच के दौरान भर्ती से पहले ही हार्ट अटैक के लक्षण मिले. इसके बाद इलाज शुरू किया गया. उन्हें वेटिंलेटर पर भी रखा गया. करीब चार बजे तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली.
कार्यकर्ता, समर्थक शोक में डूबे
बीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक अस्पताल पहुंच गए . सभी शोक में डूबे हैं.
सुदिव्य कुमार उच्च शिक्षा तकनीक मंत्री के साथ कला संस्कृति और पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.
झामुमो के वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार रहे सुदिव्य कुमार ने पहली बार 2019 में गिरिडीह से विधानसभा का चुनाव जीता था. 2024 में वे दोबारा गिरिडीह से चुनाव जीते.
वे पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष दिशोम गुरु शिबू सोरेन के भी नजदीकी रहे. साथ ही हेमंत सोरेन सरकार के साथ पार्टी की चुनावी रणनीति संभालने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
कुशल वक्ता होने के साथ सरकार की नीति, निर्णय तय करने के साथ विधानसभा के सत्रों में भी वे सत्ता पक्ष का अहम चेहरा थे.
