संताली लघु फिल्म ‘आंगेन’ के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ (नॉन-फीचर) का पुरस्कार प्रदान किया गया.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान किया.
रवि राज मुर्मू की फिल्म ‘आंगेन’ ने संताली भाषा और झारखंड की लोककथा आधारित सिनेमा को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई.
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में पहली बार किसी संताली फिल्म को नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी में सम्मान मिला. ‘आंगेन’ को संताली भाषा में बनी ऐसी फिल्म के रूप में देखा गया, जिसने स्थानीय संस्कृति, लोककथाओं और आदिवासी समाज की कहानी को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया.
फिल्म की सफलता ने संताली भाषा में फिल्म निर्माण को लेकर नई चर्चा भी शुरू की है.
जमशेदपुर से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे रवि राज
रवि राज मुर्मू झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र से जुड़े फिल्म निर्देशक हैं. उनकी फिल्म ‘आंगेन’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए सम्मानित किए जाने की घोषणा जुलाई 2026 में हुई थी. इसके बाद से ही झारखंड और संताली समाज में इस उपलब्धि को लेकर चर्चा रही.
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों में शामिल हैं. 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में वर्ष 2024 की फिल्मों और फिल्म निर्माण से जुड़ी उपलब्धियों को सम्मानित किया गया. पुरस्कारों की घोषणा 18 जुलाई 2026 को की गई थी.
‘आंगेन’ ने बड़े फलक पर उम्मीदें बढ़ायीं
‘आंगेन’ की उपलब्धि केवल एक फिल्म या एक निर्देशक के पुरस्कार तक सीमित नहीं रही. इसने संताली भाषा में बनने वाली फिल्मों और स्थानीय कहानियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की संभावनाओं को भी सामने रखा. फिल्म के माध्यम से लोककथा, गांव की मिट्टी, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़े रहने जैसे विषयों को सामने लाया गया है.
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद संताली सिनेमा से जुड़े कलाकारों, लेखकों और युवाओं के बीच भी नई उम्मीद जगी है. इससे संताली भाषा में फिल्म निर्माण को आगे बढ़ाने और स्थानीय कथाओं को बड़े मंच तक पहुंचाने के लिए प्रेरणा मिलने की संभावना है.
