रांची : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने संथालपरगना में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ को देश की आंतरिक सुरक्षा और स्थानीय जनजातीय समुदाय की अस्मिता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए केंद्रीय अमित शाह को एक पत्र लिखा है. साथ ही केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है.
बाबूलाल ने कहा है कि केंद्र की निगरानी में सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाकर घुसपैठियों की पहचान की जाए, उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाए और अंततः निर्वासित (डिपोर्ट) किया जाए.
राजद्रोह के तहत कार्रवाई हो
नेता प्रतिपक्ष ने गृहमंत्री से आग्रह किया है कि संथाल परगना प्रमंडल में तत्काल डिटेंशन सेंटर स्थापित किया जाए और वर्ष 2003-04 के खतियान के आधार पर वंशावली का सत्यापन कराया जाए.
इसके अलावा, उन्होंने निर्वाचन आयोग के माध्यम से मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने, फर्जी नाम हटाने, और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले रैकेट व उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र की केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनएआई या सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है. उन्होंने दोषियों पर राजद्रोह के तहत कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है.
डेमोग्राफी चेंज पर चिंता
उन्होंने झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र विशेषकर पाकुड़, राजमहल, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर एवं अन्य कई विधानसभा क्षेत्रों में तेजी से बिगड़ते आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य और अत्यंत चिंताजनक जनसांख्यिकीय बदलाव की ओर वर्ष 2019 से 2024 के बीच के आधिकारिक मतदाता आंकड़े को बिन्दुवार एवं विस्तृत रूप से जिक्र करते हुए बतलाया है कि कैसे एक विशेष समुदाय की आबादी आबादी तेजी से बढ़ रही है.
घुसपैठिये को बसाया जा रहा
मरांडी ने पत्र के मार्फत कहा है, “संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) का खुला उल्लंघन करते हुए मुस्लिम समुदाय विशेष के द्वारा सरकारी जमीन, गोचर भूमि और गरीब आदिवासियों की पैतृक भूमि पर सुनियोजित तरीके से कब्जे किए जा रहे हैं। फर्जी वंशावली, जाली आधार कार्ड और अवैध जन्म प्रमाण पत्र बनाकर इन बाहरी घुसपैठियों को स्थापित किया जा रहा है.इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि राज्य के सत्तारूढ़ दल और स्थानीय प्रशासन के एक वर्ग द्वारा अपने सुरक्षित ‘वोट बैंक‘ को सुरक्षित करने के लिए इन अवैध घुसपैठियों को खुला राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है. स्थानीय स्तर पर इन तत्वों को आश्वस्त किया जा रहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जाने वाले किसी भी जाँच या निष्कासन अभियान से उन्हें बचा लिया जाएगा और उनके जाली दस्तावेज तैयार कराने में पूरी मदद की जाएगी. यदि इस अवैध घुसपैठ और राजनीतिक मिलीभगत पर अविलंब रोक नहीं लगाई गई, तो वह दिन दूर नहीं जब संथाल परगना की अपनी ही भूमि से मूल ‘संथाल‘ समाज का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा.”
पाकुड़ का जिक्र
हालिया संताल परगना दौरे का हवाला देते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 2019 से 2024 के बीच मतदाता आंकड़ों में अप्रत्याशित बदलाव आया है. उन्होंने दावा किया कि पाकुड़ में कुल मतदाता 24 प्रतिशत बढ़े हैं, जिसमें एक वर्ग विशेष के मतदाताओं में 40.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि अन्य की वृद्धि दर मात्र 11.4 प्रतिशत रही. उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र और वंशावली के आधार पर बाहरी लोगों को बसाया जा रहा है और एसपीटी (SPT) एक्ट का उल्लंघन कर आदिवासियों की जमीन व सरकारी भूमि पर कब्जे हो रहे हैं.
उन्होंने पत्र में झारखंड में सत्तारूढ़ दलों और स्थानीय प्रशासन के एक वर्ग द्वारा अपने ‘वोट बैंक‘ को सुरक्षित करने के लिए कथित तौर पर इन अवैध घुसपैठियों को खुला राजनीतिक संरक्षण देने का भी जिक्र किया है.
