रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है. इसमें सरकार द्वारा 25 अगस्त को जेपीएससी और जेएसएसी की परीक्षाओं में सुधार और निगरानी के लिए गठित एक कमेटी पर सवाल उठाया है.
मरांडी ने कहा है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि फरवरी 2024 से JSSC के अध्यक्ष पद पर आसीन वित्त सचिव प्रशांत कुमार को ही इस समिति में शामिल कर दिया गया है.
उन्होंने कहा है, “सितंबर 2024 की विवादित JSSC-CGL परीक्षा प्रशांत कुमार के कार्यकाल में आयोजित हुई. परीक्षा रद्द करनी पड़ी. JSSC कार्यालय में छापेमारी हुई. आयोग के सचिव से पूछताछ हुई और पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा. ऐसे में जिस अधिकारी के कार्यकाल और प्रशासनिक भूमिका की स्वतंत्र निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए, उसे ही व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी देना स्पष्ट रूप से हितों का टकराव है.”
प्रशासनिक आचरण पर सवाल
मरांडी ने पत्र में कहा है, “वित्त सचिव प्रशांत कुमार के प्रशासनिक आचरण और कार्यशैली को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं. वित्त सचिव रहते हुए राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर पर विभाग द्वारा स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया. जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले में माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने अदालत को गुमराह करने और आदेश का पालन नहीं करने पर उन पर जुर्माना भी लगाया था.इसके बावजूद उन्हें परीक्षा सुधार समिति में रखना सरकार की मंशा को संदेहास्पद बनाता है>”
मरांडी ने कहा, “यह निर्णय इतना स्पष्ट रूप से अनुचित है कि इसे देखने के लिए आँखों की भी आवश्यकता नहीं है. जिस अधिकारी की जवाबदेही तय होनी चाहिए, उसी को सुधारक बनाना ठीक वैसा ही है जैसे दूध की रखवाली बिल्ली को सौंप देना.”
मरांडी की मांग
- JSSC-CGL परीक्षा में गड़बड़ी करने के आरोप में प्रभारी अध्यक्ष श्री प्रशांत कुमार एवं JSSC सचिव सुधीर गुप्ता को तत्काल हटाते हुए गिरफ्तार कर इनके कार्यकाल की स्वतंत्र एजेन्सी से जाँच कराई जाए.
- प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाया जाए. JSSC-CGL से संबंधित एजेंसी चयन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, परीक्षा संचालन, परिणाम प्रक्रिया तथा सभी प्रशासनिक अनुमोदनों में उनकी भूमिका की जाँच की जाए.
- समिति में निष्पक्ष न्यायिक, तकनीकी एवं शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को स्थान दिया जाए.
- JPSC-JSSC भर्ती अनियमितताओं की जाँच CBI को सौंपकर छात्रों का विश्वास बहाल किया जाए.
