रांचीः पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध कर रहे झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस की सरकार पर हमला बोला है. इसके साथ ही कहा है कि इस संशोधन विधेयक का खिलाफत करने के पीछे राज्य में अवैध खनन सिंडिकेट को बचाने की छटपहाट है.
प्रदेश बीजेपी कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में रघुवर दास ने एमएमडीआर संशोधन कानून को राज्य और राष्ट्र के हित में बताया. उन्होंने कहा कि इससे राज्य में वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा और अवैध खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
सेस पर राज्य सरकार से सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से लगाए गए सेस को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार 11,000 करोड़ रुपए के सेस को लेकर केंद्र पर सवाल उठा रही है, लेकिन खनन से मिलने वाले दूसरे राजस्व और फंड का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इस पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र से मिलने वाले टैक्स और वैधानिक भुगतान का करीब 90 फीसदी हिस्सा राज्यों को मिलता है और यह राजस्व आगे भी झारखंड को मिलता रहेगा. इसके अलावा केंद्र की ओर से डीएमएफटी फंड के माध्यम से भी राशि उपलब्ध कराई जाती है.
उन्होंने कहा, “सवाल केवल 11,000 करोड़ रुपये के उपकर (CESS) का नहीं है. असल सवाल यह है कि क्या हम ‘वित्तीय अनिश्चितता’ (Fiscal Uncertainty) का माहौल बनाकर राज्य में आने वाले बड़े निवेश, अधिक उत्पादन, रोजगार और औद्योगिक क्रांति का रास्ता रोक दें. माइनिंग सेक्टर के कुल टैक्स और वैधानिक भुगतान (Statutory Payment) का लगभग 90% हिस्सा सीधे राज्यों को ही मिलता है, और यह व्यवस्था आगे भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी.”
ओडिशा से सीखे झारखंड सरकार
रघुवर दास ने कहा कि अन्य राज्यों से तुलना एवं DMFT की स्थिति समान खनिज भंडार होने के बावजूद, ओडिशा वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹60,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य हासिल कर रहा है, जबकि झारखंड का लक्ष्य केवल ₹18,844 करोड़ है. ओडिशा की त्वरित नीलामी और खदान संचालन प्रक्रिया के कारण उसकी राजस्व दक्षता झारखंड से 3 गुना अधिक है. इसके अलावा, DMFT के कुल संग्रह (₹18,250 करोड़) में से ₹7,915 करोड़ से अधिक की राशि बिना खर्च पड़ी है और 2,487 प्रोजेक्ट्स ठप्प हो चुके हैं.
डीएमएफटी का खोला कच्चा चिट्ठा
श्री दास ने कहा कि खनन से प्रभावित हमारे जिलों का हाल देखिए, धनबाद में 2,393.58 करोड़ रुपये, चाईबासा में 1,802.82 करोड़, चतरा में 1,055.40 करोड़, पाकुड़ में 527.88 करोड़ और रामगढ़ में 518.82 करोड़ रुपये का डीएमएफटी फंड खर्च ही नहीं किया गया. 2,487 योजनाएं रद्द, अस्पतालों में दवा नहीं, पीने का साफ पानी नहीं, चाईबासा में लोग लाल पानी और धनबाद में काला पानी पीने को मजबूर हैं.
डीएमएफटी में राज्य सरकार द्वारा कुछ राशि खर्च भी की गई है, तो वह घोटाले की भेंट चढ़ गई है. डीएमएफटी घोटाले से संबंधित खबरें लगातार आती रही हैं.
छह साल में किनकी दशा सुधरी
रघुवर दास ने सवालिया लहजे में पूछा कि हेमंत सरकार बताए कि 6 साल में किस आदिवासी मूलवासी की दशा सुधरी है. कांग्रेस और झामुमो का यह विरोध राज्य के हित में नहीं, बल्कि अपने अवैध सिंडिकेट और जेब में आ रहे काले धन को बचाने की आखिरी छटपटाहट है. छात्रों और युवाओं के साथ लगातार छल कर रही यह सरकार मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए झूठा आंदोलन खड़ा करने की धमकी दे रही है. लेकिन झारखंड की जनता अब इनके इस लूट तंत्र को पूरी तरह समझ चुकी है और इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है.
