परीक्षाओं में अनियमितताओ और पेपर लीक के सवाल पर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक महीने से अधिक समय तक धरना प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.
हालांकि अभी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफ़ा सौंपा है और इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के स्वीकार करने के बाद स्वीकृत माना जाएगा.
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया है कि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा प्रधानमंत्री को भेजा है, हालांकि उनका इस्तीफ़ा स्वीकार होना बाक़ी है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताक़तें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य क़ानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फ़ोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है.”
इस्तीफ़े के फ़ैसले के बाद जंतर-मंतर पर मंच से सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि “हमने कर दिखाया. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दे दिया है.”
उन्होंने कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा तो हो गया और ये इस्तीफ़ा इस बात का गवाह है कि अगर आप लोग डरेंगे नहीं और सरकार के सामने झुकेंगे नहीं तो अच्छे अच्छों के हम इस्तीफ़े ले सकते हैं.”
इस्तीफे पर मंत्री ने क्या कहा
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी लंबे संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने हर स्तर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई और देश के युवाओं के हितों को सर्वोपरि रखा. ले पिछले चार दशक से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं. उनका मानना है कि सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है. उन्होंने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का हमेशा सम्मान करते रहे हैं.
नीट-यूजी परीक्षा विवाद पर रखी बात
प्रधान ने कहा कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा की तिथि घोषित की. उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से परीक्षा सीबीटी मोड में कराने का निर्णय भी लिया गया. सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना रही, जिसमें केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला.
जिम्मेदारी की बात दोहराई
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली और कभी इससे मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो.
उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि के कई छात्रों ने सफलता हासिल की. हालांकि, इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा.
