जमशेदपुरः झारखंड दौरे पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के करनडीह स्थित आदिवासी पूजास्थल ‘दिशोम जाहेरथान’ परिसर में संताली भाषा की ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए परंपरागत ज्ञान, संस्कृति और अस्मिता को संरक्षित रखने का आह्वान किया.
ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने संथाली भाषा में पूरा संबोधन किया. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना उनके लिए भावनात्मक क्षण है, जहां अपने लोगों का प्रेम और इष्टदेवों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ है.
उन्होंने ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु को श्रद्धांजलि अर्पित की. आदिवासी समाज के स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा में संथाली लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आप अपने दैनिक जीवन से समय निकालकर ओल चिकी लिपि और संताली भाषा के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु के अधूरे सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं.
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर भारत सरकार की ओर से ओलचिकी लिपि में संविधान के प्रकाशन को संथाली समाज को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद यह आवश्यक है कि देश के नियम-कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी संथाली भाषा में समाज के लोगों तक पहुंचे.
समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 12 लोगों को सम्मानित किया.

जाहोर आयो प्रार्थना गीत
अपने संबोधन से पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने संताली भाषा में करीब तीन मिनट तक पारंपरिक ‘नेहोर गीत’ गाया। उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना गीत उन्होंने बचपन में सीखा था, जिसमें ‘जाहेर आयो’ (प्रकृति माता) से समाज को सदैव उजाले के मार्ग पर ले जाने की कामना की गई है.
भाषा भविष्य की दिशा तय करती है
समारोह को राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी संबोधित किया. राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति, कला और अस्मिता का जीवंत उत्सव है. उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति हैं.
उन्होंने राष्ट्रपति का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनकी सादगी, संवेदनशीलता और जनजातीय उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता सम्पूर्ण देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं.
हेमंत सोरेन ने कहा
इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जनजातीय भाषा और संस्कृति को पहचान एवं सम्मान दिलाने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है. इस दिशा में आदिवासी समाज के साथ मिलकर प्रयास निरंतर जारी है. इसी क्रम में यह समारोह भी काफी विशेष है. क्योंकि, हमें संताली भाषा और साहित्य के विकास में साहित्यकारों तथा
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्रदेश में ओलचिकी लिपि से संथाली भाषा का पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार वचनबद्ध है. साथ ही जनजातीय भाषाओं के विकास और उसे सुरक्षित, संरक्षित और समृद्ध करने की दिशा में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं. आज संताली जैसी जनजातीय भाषाओं से आदिवासी समाज की आवाज बहुत दूर तक पहुंच रही है.
