रांचीः राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़, जवाबदेह एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विभाग के आला अधिकारियों और सभी सिल सार्जनों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कई निर्देश दिए हैं.
बैठक में अस्पतालों की कार्यप्रणाली, चिकित्सकों की उपलब्धता, दवा आपूर्ति, एंबुलेंस सेवा, स्वास्थ्य संसाधनों तथा आगामी मानसून को लेकर तैयारियों की गहन समीक्षा की गई.
स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि राज्य के सभी सदर अस्पतालों एवं रेफरल अस्पतालों में चार-चार अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएंगी. यह व्यवस्था 108 एंबुलेंस सेवा से अलग होगी ताकि गंभीर मरीजों को समय पर और त्वरित सहायता मिल सके.
उन्होंने बताया कि एंबुलेंस संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अस्पतालों को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं एवं टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे. सिविल सर्जन अथवा डीएस को सूचना मिलते ही तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराने की जवाबदेही तय की जाएगी.
इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे सदर अस्पताल परिसर में ही निवास करें तथा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल उपलब्ध रहें. बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन सहित कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
मानसन को लेकर तैयारियां करें
मंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर एवं अन्य मौसमी बीमारियों के मामलों में वृद्धि होती है. ऐसे में सभी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं, बेड, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए.
बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान करना भी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है और अब उसके सकारात्मक परिणाम भी धरातल पर दिखाई देने चाहिए.
एनएचएम के कार्यों पर
स्वास्थ्य मंत्री ने एनएचएम के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा को निर्देश दिया कि सिविल सर्जनों को पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे अपने जिलों में त्वरित एवं प्रभावी निर्णय ले सकें. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए संबंधित सिविल सर्जन पूर्ण रूप से जवाबदेह होंगे.
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल अथवा कार्य बहिष्कार जैसी परिस्थितियों में पहले संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया जाएगा. हालांकि यदि कोई कर्मचारी जनहित के विरुद्ध कार्य करता है तो आवश्यक कार्रवाई करने में कोई कोताही नहीं की जाएगी.
