सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया.
इस याचिका के जरिए भारत में चल रही मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम काटे जाने के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती दी गई थी.
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा और इस याचिका को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न (एसआईआर) की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया.
अदालत ने चुनाव आयोग के अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी नोटिस जारी किया है.
हालांकि, नोटिस जारी करते हुए बेंच ने एक याचिकाकर्ता के व्यवहार को लेकर सवाल भी उठाया.
लाइव लॉ के मुताबिक़ बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई पर वह याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके व्यवहार के बारे में जवाब मांगेगी. अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसकी टिप्पणी किस याचिकाकर्ता को लेकर थी.
बार एंड बेंच के अनुसार, कोर्ट ने कहा है कि वह एक याचिकाकर्ता के आचरण पर सफाई मांगेंगे. हालांकि, इस दौरान यह नहीं कहा गया कि किस नेता से सवाल पूछे जाएंगे। कोर्ट ने कहा, ‘नोटिस जारी कर दिया है, लेकिन उससे पहले एक आपत्ति है. हम अगली सुनवाई पर एक याचिकाकर्ता से उनके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे। नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि हम किसी चीज की निंदा कर रहे हैं.’
राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, राकांपा एसपी की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत, भाकपा के डी राजा और कुछ अन्य नेता भी इस याचिका में शामिल हैं.
