नयी दिल्ली: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि अगली जनगणना में जाति गणना को शामिल करने के सरकार के फैसले ने ‘‘असली इरादों और खोखली नारेबाजी’’ के बीच के अंतर को उजागर किया है.
गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधान ने इस कदम को ‘‘पासा पलटने वाला फैसला’’ बताया जिसका कई विपक्षी दलों ने स्वागत किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘इस महत्वपूर्ण फैसले ने हमारे असली इरादों और विपक्ष की खोखली नारेबाजी के बीच के अंतर को उजार किया है. हालांकि अधिकतर विपक्षी दलों ने इसका स्वागत किया है.’’
प्रधान ने जाति जनगणना कराने के फ़ैसले को केंद्र सरकार का एक बहुत बड़ा क़दम बताते हुए कहा कि ये फ़ैसला सामाजिक न्याय के लिए एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “जाति जनगणना का यह निर्णय कोई एकाएक नहीं लिया गया है। सबका साथ-सबका विकास मोदी सरकार का सैद्धांतिक और दार्शनिक मत रहा है. हमारे सारे कार्यक्रमों की, योजनाओं का मूल लक्ष्य सामाजिक न्याय ही रहा है।समाज के सभी वर्गों तक लाभ, सुविधा, सहूलियत वैज्ञानिक तरीके से पहुंचे ये हमारा लक्ष्य रहा है.”
बुधवार को कैबिनेट कमेटी की एक बैठक में जाति जनगणना कराने का फ़ैसला लिया गया. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए बताया कि जातियों की गिनती जनगणना के साथ की जाएगी.
सरकार ने यह घोषणा करते हुए जाति सर्वेक्षणों को ‘‘राजनीतिक उपकरण’’ के रूप में इस्तेमाल करने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की.
कांग्रेस सहित विपक्षी दल देश भर में जाति जनगणना की मांग कर रहे हैं और इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया गया है. बिहार, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कुछ राज्य पहले ही ऐसे सर्वेक्षण कर चुके हैं.
