कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री. सत्ता बीजेपी के पास जाएगी या अभी इसमें देर है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत का सियासी सफर रविवार से शुरू होगा, जब वे औपचारिक तौर पर जेडीयू ज्वाइन करेंगे. तब सरकार और संगठन में निशांत की हैसियत कैसे तय होगी. क्या निशांत सरकार में नंबर टू पर रहेंगे. क्या नीतीश कुमार का ब्रांड ही निशांत के लिए काफी होगा या उन्हें अपनी काबिलयत भी साबित करनी होगी.
सवाल और भी हैं, जो न सिर्फ बीजेपी और जदयू के गलियारे में तैर रहे हैं, बल्कि एनडीए के रणनीतिकारों को ये मथ भी रहे हैं. पूरे देश की नजर इन दिनों बिहार की सियासत पर टिकी है. 16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव है. और नीतीश कुमार राज्य सभा जाने के लिए आगे बढ़ चुके हैं. जाहिर तौर पर इन बातों को लेकर अटकलों का दौर जारी है कि अगला सीएम कौन होगा.
बिहार की सियासत में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच रविवार, आठ मार्च का दिन भी एक नये अध्याय के साथ अहम होने वाला है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जदयू की सदस्यता लेंगे और इसके साथ ही वे पार्टी की पहले सफ़ में शामिल हो जाएंगे.
पार्टी में शामिल होने से पहले निशांत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर एक बैठक में शामिल भी हुए. इस बैठक में जदयू के कई सीनियर नेता मौजूद थे, जिनमें मंत्री श्रवण कुमार भी प्रमुख थे. पार्टी के कई युवा और नए विधायक भी इस बैठक में नजर आए. युवा नेताओं में कोमल सिंह और चेतन आनंद जैसे चेहरे भी शामिल थे. इस बैठक को निशांत कुमार के पॉलिटिक्स में एंट्री के रिहर्सल के तौर पर देखा जा रहा है.
नये अध्याय की शुरुआत
अलबत्ता पटना की सड़कों पर जदयू कार्यकर्ता, समर्थक पोस्टर जारी कर रहे हैं. जदयू कार्यालय के बाहर एक पोस्टर पर लिखा है- “विकसित बिहार के नये अध्याय की शुरुआत निशांत कुमार”. पार्टी के विधायक, नेता,कार्यकर्ता, समर्थक निशांत में नीतीश कुमार की छवि देखने लगे हैं. लेकिन निशांत को अभी नीतीश कुमार की छवि हासिल करने में लंबा वक्त तो लगेगा ही, खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती भी उनके सामने होगी. दरअसल अब तक वे राजनीति से बिल्कुल अलग रहे हैं. 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के समय से कुछ कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी देखी जा रही है.
जदयू ज्वाइन करने के बाद निशांत कुमार बिहार की यात्रा पर निकलेंगे. इसकी तैयारी भी शुरू है. नीतीश कुमार के राज्य सभा जाने की खबर के साथ ही जदयू के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में बेचैनी है और गुस्सा भी. पटना में जदयू कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन, पार्टी के कुछ खास नेताओं तथा भाजपा के खिलाफ नारेबाजी वैसे ही जगजाहिर है. निशांत के पार्टी में ज्वाइनिंग की खबर के साथ यह गुस्सा ठंडा पड़ने और असमंजस की स्थिति स्थिर होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
नीतीश ने माहौल को संभाला
इससे पहले शुक्रवार की शाम नीतीश कुमार के एक अण्णे मार्ग पर पार्टी के प्रमुख नेताओं, सांसदों और विधानमंडल के सदस्यों की बैठक की तस्वीरें अलग थीं और नजारे भी. कई विधायक, मंत्री भावुक थे. और गंभीर भी. उनके मन में कई सवाल थे. उन्होंने मन की बात नीतीश कुमार के सामने रख दी. कहा, “आपका मुख्यमंत्री पद छोड़ना ठीक नहीं. हमलोग आपके साथ मजबूती से खड़े हैं, पर राज्यसभा जाने क निर्णय ठीक नहीं. इसी बैठक में पार्टी के अधिकार विधायकों की तरफ से मांग रखी गई कि निशांत कुमार को आगे आना चाहिए.”
कुछ पलों के लिए नीतीश कुमार भी भावुक हुए, पर उन्होंने मंजे राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर माहौल को संभाल लिया.
नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि राज्यसभा चुनाव लड़ने के उनके फैसले से पार्टी या राज्य में सरकार पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा.
बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं से कहा, “आपको कोई दिक्कत नहीं होगी. हम बिहार में भी रहेंगे. सारा काम चलता रहेगा. चिंता न करें. हम राज्यसभा जा रहे हैं और सब कुछ देखते रहेंगे.आपकी समस्याओं का समाधान भी करते रहेंगे.”
बैठक में भावुक माहौल को देखते हुए नीतीश कुमार ने अपने नेताओं को समझाया. उन्होंने कहा कि वे भले ही राज्यसभा जाएं, लेकिन पार्टी और सरकार से जुड़े मुद्दों पर उनका मार्गदर्शन जारी रहेगा.
पल-पल बदलती राजनीति
निशांत जदयू में शामिल होंगे, यह खबर भी अब पीछे छूटती जा रही है. अब एक सवाल पल-पल बदलती राजनीति के केंद्र में है कि निशांत सरकार में किस भूमिका में होंगे. शनिवार को ही जदयू के वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और नीतीश कुमार के बेहद नजदीके माने जाने वाले ललन सिंह का बिहार में नई सरकार गठन को लेकर एक बयान सामने आया है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मर्जी और इच्छा से ही तय होगा.
ललन सिंह ने पटना में कहा, “मैं कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी पर क्या प्रतिक्रिया दूं, यह सारा निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इच्छा और उनकी मर्जी से हुआ है. उन्होंने आरसीपी सिंह पर निशाने साधते हुए कहा, पार्टी में नहीं रहने वाले नेताओं की बातों का कोई मूल्य नहीं है, इसलिए उनके बयान पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक नहीं.”
जाहिर तौर पर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद तो छोड़ रहे हैं, लेकिन बिहार के नये सीएम को लेकर उनकी बात ही चलने वाली है. मुमकिन है नीतीश कुमार ठोक- बजाकर ही निर्णय लेंगे. जदयू का भविष्य भी देखेंगे.
किस भूमिका में रहेंगे निशांत
अब बात करते हैं निशांत की. बीजेपी के पास सीएम का पद गया, तो निशांत डिप्टी सीएम हो सकते हैं. और गृह मंत्रालय सम्राट चौधरी से वापस लेकर जदयू के पास आ सकता है.
बहरहाल, लो प्रोफाइल में रहने वाले सहज, सरल, शांत निशांत के जदयू ज्वाइन करने से बिहार की सियासत में एक नया चैप्टर तो जरूर जुड़ेगा, पर निशांत को अपनी काबलियत साबित करनी ही होगी. नीतीश कुमार के पुत्र का ब्रांड तो उनके पास होगा,लेकिन बिहार की सियासत को पढ़ना, समझना और उसमें जमना उन्हीं को पड़ेगा.
सीएम नीतीश कुमार बिहार के ऐसे जमे-जमाये राजनेता हैं, जिन्होंने सत्ता संभालते हुएअपने राज्य की 16 बार यात्राएं कीं. इसके साथ ही विकास कार्यों का जायजा लिया. जीविका की स्थापना की और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई सकारात्मक पहल की.
जानें निशांत को
निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा पटना के सेंट कैरेंस स्कूल और केंद्रीय विद्यालय से हुई. 12वीं की पढ़ाई मसूरी के मानव भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल से की. इसके बाद बीआईटी मेसरा, रांची से इंजीनियरिंग की डिग्री ली. निशांत को एक शांत और ‘लो-प्रोफाइल’ व्यक्ति माना जाता है. उनकी रुचि अध्यात्म में रही है और वे लंबे समय तक एक्टिव पॉलिटिक्स और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहे हैं.
