बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में आसानी से विश्वास मत हासिल करलिया है.
शुक्रवार को बिहार विधानसभा में उन्होंने विश्सवास मत हासिल किया. विपक्ष ने वोटिंग की की मांग नहीं की, जिसके बाद स्पीकर ने ध्वनि मत से सम्राट चौधरी के विश्वास मत प्रस्ताव को पारित घोषित कर दिया.
इससे पहले सदन में विश्वास मत के प्रस्ताव पर एनडीए और विपक्ष के नेताओं के बीच बहस हुई.
तेजस्वी ने प्रस्ताव के विरोध में कहा कि 25 से 30, फिर से नीतीश बोलकर बीजेपी ने नीतीश को फिनिश कर दिया ह.। जवाब देते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार को कोई हटा नहीं सकता, बल्कि उनकी इच्छाशक्ति से आज वो मुख्यमंत्री बने हैं.
सम्राट चौधरी ने तेजस्वी के उस बयान का भी जवाह दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सम्राट चौधरी लालू की पाठशाला से निकले हैं.
उन्होंने विधानसभा में कहा कि ‘कोई किसी के पाठशाला से नहीं होता’ और कोई भी इस ‘ग़लतफ़हमी में न रहे’.
सम्राट चौधरी ने कहा, “कुछ लोगों को लगता है हमारी पाठशाला है. इस बपौती से बाहर निकलिए. किसी की बपौती नहीं है ये सत्ता. ये जो मुख्यमंत्री का पद है वो 14 करोड़ बिहारियों का आशीर्वाद है, इसलिए आज मैं बैठा हूं.”
उन्होंने दावा किया कि लालू प्रसाद यादव नीतीश कुमार की बदौलत बिहार के मुख्यमंत्री बने थे.
सम्राट चौधरी ने कहा, “नीतीश जी नहीं होते तो लालू जी मुख्यमंत्री होते क्या? लालू जी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने बनाया, कोई किसी के पाठशाला से नहीं होता है. मैंने तो कहा है कि मेरी राजनीति में लालू यादव जी का अत्याचार नहीं होता तो मैं बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बन पाता. न ही जेल जाता और न ही राजनीति में आता. इसलिए कोई ग़लतफ़हमी में मत रहिए.”
उन्होंने कहा कि नीतीश नहीं होते तो लालू विधायक बन जाते, लेकिन नेता नहीं बन पाते। उन्होंने लालू के पहली बार सीएम बनने की याद दिलाते हुए कहा कि आरएसएस के सामने घुटना टेकने के बाद ही लालू यादव को पहली बार हल्दी लगा था. उम्र, डिग्री विवाद और एफिडेविट को लेकर विधानसभा में सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष को करारा जवाब दिया. उन्होने कहा कि 1999 में पहली बार मंत्री बना था, अब छठी बार मंत्री से मुख्यमंत्री तक पहुंचा। 27 साल हो गए हैं.
