झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की जड़ें गहरी हैं. जांच आगे बढ़ने के साथ कई परतें खुलने लगी हैं. कम से कम सात जिलों में वेतन के नाम पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध निकासी की जानकारी मिल रही है. स्टेट ऑडिट भी जांच के दायरे में है.
इस बीच वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें तीन साल से एक ही जगह जमे अधिकारियों-कर्मचारियों का तत्काल तबादला करने को कहा गया है. यह तबादला वहां नहीं होना चाहिए, जहां ये अफसर, कर्मचारी पहले रह चुके हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक सात जिलों- बोकारो, हजारीबाग, पलामू, जमशेदपुर, देवघर, रामगढ़ व रांची ट्रेजरी से वेतन के नाम पर यह निकासी हुई है. इसमें ट्रेजरी, सब ट्रेजरी, पेंशन एवं लेखा कार्यालय ओर स्टेट ऑडिट में तैनात कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पदों पर वित्तीय निगरानी और ऑडिट की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब शक के घेरे में हैं.
जांच में पता चला है कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे लोगों की मिलीभगत का परिणाम हो सकता है.
डीडीओ और ट्रेजरी अफसर के अलावा स्टेट ऑडिट के सीनियर ऑडिटर, ऑडिट अफसर, लेखा निदेशालय के लेखा सहायक व वरीय लेखा सहायक और ट्रेजरी के लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर पर शक की सुई है.
सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के लिए उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है. इस समिति ने भी जांच शुरू कर दी है. बोकारो, हजारीबाग, रांची जिले में अवैध निकासी के मामले में जो प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं, उसे टेकअप करने की तैयारी में सीआइडी जुटा है.
