पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर- बाहर उथल-पुथल तेज है. बुधवार को ऋतब्रत बंद्योपाध्याय पार्टी के विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को 58 सदस्यों के हस्ताक्षरों वाला एक पत्र सौंपा है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक टीएमसी के विधायकों ने स्पीकर से मिलकर यह पत्र सौंपा है. स्पीकर ने यह पत्र स्वीकार कर लिया है. हालांकि यह पत्र फिर भी पुष्टि करता है कि ममता बनर्जी पार्टी की नेता हैं.
पश्चिम बंगाल के चुनाव में टीएमसी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की है. जबकि भाजपा ने 207 सीटों पर जीत के साथ पहली बार सत्ता में आई है.
58 विधायकों के बगावती तेवर को लेकर अटकलों का दौर शुरू है कि क्या बंगाल में भी महाराष्ट्र मॉडल दोहराया जाएगा? क्या तृणमूल कांग्रेस भी उसी तरह टूट जाएगी जिस तरह वर्ष 2022 में शिवसेना टूटी थी?
सभी कमेटियां भंग
इस बीच पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़ी सभी कमेटियां और उससे जुड़े सभी संगठन भंग कर दिए गए हैं.
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने टूट की आशंका के बीच बुधवार को यह एलान किया है.
टीएमसी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी गई, “गहन विचार के बाद यह तय किया गया है कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियां और उससे जुड़े सभी संगठन तुरंत भंग किए जाते हैं.”
आगे कहा गया है, “पार्टी अब हर स्तर पर आत्म-मंथन, कामकाज की समीक्षा और संगठन की जांच करेगी. इस प्रक्रिया से जो नतीजे निकलेंगे, उसके आधार पर मुख्य संगठन और उससे जुड़े सभी संगठन दोबारा बनाए जाएंगे और सही समय पर इसकी घोषणा की जाएगी.”
एक्स पोस्ट में लिखा है, “पार्टी अपने संगठन को मज़बूत करने और आने वाले समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
बगावती तेवर, अब आगे क्या
गौरतलब है कि चुनाव नतीजों के बाद पार्टी में बग़ावती सुर अचानक तेज़ होने लगे हैं.
कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस हार के लिए तृणमूल सरकार के कामकाज के तरीके़ और पार्टी की चुनावी रणनीति को ज़िम्मेदार ठहराया है.
पार्टी के दो-फाड़ होने या बिखरने पर रोज़ नए-नए कयास और दावे सामने आ रहे हैं.
