रांचीः बोकारो की 18 वर्षीय युवती पुष्पा कुमारी के तथाकथित कंकाल मिलने के मामले में मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस क्रम में बरामद कंकाल और माता-पिता के डीएनए सैंपल मिलान की फॉरेंसिक रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गयी. अदालत ने रिपोर्ट की बारिकियों को समझने के लिए तीन दिनों के बाद 25 जून को सुनवाई की अगली तारीख तय की है.
यह सुनवाई न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद के खंडपीठ में हुई. सील बंद लिफाफे में पेश की गयी रिपोर्ट की तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए अदालत को चिकित्सीय विशेषज्ञों का सहारा लेना होगा.
सुनवाई के दौरान अदालत में अनुसंधान के लिए गठित की गई ैप्ज् की पूरी टीम अदालत में सशरीर उपस्थित रही.
मां ने दायर की है याचिका
बोकारो के पिंडरा जोड़ा थाना क्षेत्र की पुष्पा कुमारी 31 जुलाई 2025 से लापता है. काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका सुराग नहीं मिला, तो उसकी मां ने हाईकोर्ट में हेवियस कॉर्पस याचिका दायर कर अपनी बेटी को खोजने की गुहार लगाई. इस संबंध में बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या-147/2025 दर्ज है.
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने एक जंगल के कंकाल बरमाद किया और दावा किया कि यह कंकाल पुष्पा का है. तब कोर्ट ने पूछा था कि इसकी प्रमाणिकता क्या है.
पुष्पा के लापता होने के मामले में महीनों तक कार्रवाई नहीं करने और लापरवाही को लेकर पिडराजोड़ा थाना के 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया था. तब भी अदालत ने कहा था क्या इस लापरवाही के लिए सिर्फ छोटे पुलिसकर्मी दोषी हैं.
इसके साथ ही कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट पेश करने को कहा. अब अगली सुनवाई में पता चलेगा कि डीएनए जांच रिपोर्ट में क्या कुछ आया है.
कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी
इससे पहले सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य के तत्कालीन डीजीपी तदाशा मिश्र से स्पष्ट जवाब मांगा था कि बरामद कंकाल का डीएनए परीक्षण अब तक क्यों नहीं कराया गया.
अदालत ने यह भी जानना चाहा था कि युवती के माता-पिता के नमूने लेकर उन्हें फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है या नहीं. कोर्ट ने कहा था कि कंकाल मिलने के तीन-चार दिन बाद भी वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं होना समझ से परे है.
खंडपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या जांच एजेंसियां अदालत के आदेश का इंतजार कर रही हैं. अदालत ने जांच अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए थे.
