भारतीय राजनीति का प्रमुख चेहरा, झारखंड आंदोलन के प्रमुख नायक पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने के बाद उनके पुत्र तथा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया सामने आई है.
सोशल मीडिया के एक्स पर उन्होंने विस्तार से शिबू सोरेन के कार्यों और योगदान की चर्चा की है.
सोरेन ने कहा है, “आज स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किया जाना उनके आजीवन संघर्ष, त्याग, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण को दिया गया सम्मान है. बाबा के संघर्ष की साथी, आदरणीय माँ ने यह सम्मान ग्रहण किया. यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन संघर्षों, मूल्यों और सपनों का सम्मान है, जिनके लिए विराट वृक्ष रूपी दिशोम गुरुजी जीवनभर अडिग होकर खड़े रहे. मैं स्मृति शेष दिशोम गुरुजी को यह सम्मान प्रदान किए जाने के लिए आदरणीय राष्ट्रपति जी एवं केंद्र सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ.”
अद्वितीय और अविस्मरणीय
हेमंत सोरेन ने आगे कहा है कि जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और झारखंड के हक-अधिकारों की लड़ाई में दिशोम गुरुजी का नेतृत्व ऐतिहासिक, अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा है. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों, शोषितों, आदिवासियों और मेहनतकश समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित किया. दिशोम गुरुजी झारखण्ड अलग राज्य के निर्माण के संघर्ष के साथ-साथ, अखिल भारत के राज्यों के आदिवासी, दलित, शोषित, पीड़ित के संघर्ष के प्रेरणाश्रोत बनें; वहीं दूसरी ओर वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण, शिक्षा की अलख जगाने और समाज को संगठित करने के कार्य में भी सदैव नेतृत्वकर्ता रहे.

सत्ता से अधिक जनता के दिलों में
हेमंत सोरेन ने कहा है, “हम मानते हैं कि पुरस्कार/सम्मान का महत्व उस भावना में होता है जिसके साथ वह दिया जाता है। बाबा को किसी ने महाजनी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने वाला योद्धा कहा, किसी ने आदिवासियों और गरीबों के अधिकारों का प्रहरी. लेकिन हमारे लिए वे ऐसे जननायक हैं जिन्होंने सत्ता से अधिक जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई.”
उन्होंने कहा, “आज देश ने पद्म भूषण सम्मान से स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरुजी के महान योगदान को नमन किया है, किंतु झारखंड सहित देशभर के करोड़ों लोगों के हृदय में बाबा को जो स्थान प्राप्त है, वह सदैव सर्वोच्च रहा है. हमारे लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे. स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें! जय झारखंड!”

सर्वोच्च नागरिक सम्मान
मंगलवार को संसद भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन को सौंपा गया.
इस अवसर पर शिबू सोरेन की बहू, जेएमएम की विधायक कल्पना सोरेन, पुत्री अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे.
भारतीय राजनीति का बड़ा आदिवासी चेहरा
झारखंड आंदोलन के नायक शिबू सोरेन ने आदिवासियों, वंचितों के सामाजिक उत्थान, झारखंड अलग राज्य आंदोलन को मुकाम पर पहुंचाने के लिए दशकों तक संघर्ष किया.
यही कारण है कि उनके समर्थक, चाहने वाले और खासकर आदिवासी समाज उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि “दिशोम गुरु” के रूप में याद करते हैं.
पिता की हत्या के बाद महाजनी प्रथा के खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाने के लिे भी उन्हें आदिवासियों तथा मूलवासियों के बीच एक बड़ी शख्सियत के तौर पर स्थापित किया. सामाजिक कुरितियों के खिलाफ आवाज मुखर की और लोगों को गोलबंद भी किया.
झारखंड आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने में उनके संघर्ष को हमेशा याद किया जाता रहेगा. वे झारखंड में तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे. हालांकि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वे तीनों बार कम दिनों तक रहे. अलग-अलग कारणों से उन्हें तीनों बार इस्तीफा देना पड़ा.
आदिवासियों के लिए सुरक्षित दुमका लोकसभा क्षेत्र से वे आठ बार सांसद भी रहे. केंद्र में भी मंत्री रहे.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष रहे शिबू सोरेन का जन्म जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. पिछले साल चार अगस्त को उनका निधन हुआ.
अभी झारखंड मुक्ति मोर्चा की कमान शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन संभाल रहे हैं. साथ ही सत्ता की बागडोर भी उनके हाथों में है.
शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग कई मौके पर उठती रही है.
