झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार, और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.
मंगलवार को संसद भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन को यह सम्मान प्रदान किया.
इस अवसर पर शिबू सोरेन की बहू कल्पना सोरेन, अंजनी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे.
शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी समाज, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान के लिए दिया गया है.
भारतीय राजनीति का बड़ा आदिवासी चेहरा
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने दशकों तक आदिवासियों, वंचितों और झारखंड की पहचान के लिए संघर्ष किया. यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि “दिशोम गुरु” के रूप में याद करते हैं.
झारखंड आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने में उनके संघर्ष को हमेशा याद किया जाता रहेगा. वे झारखंड में तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे. हालांकि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वे तीनों बार कम दिनों तक रहे. अलग-अलग कारणों से उन्हें तीनों बार इस्तीफा देना पड़ा.
आदिवासियों के लिए सुरक्षित दुमका लोकसभा क्षेत्र से वे आठ बार सांसद भी रहे. झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष रहे शिबू सोरेन का जन्म जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था. पिछले साल चार अगस्त को उनका निधन हुआ.
पिता की हत्या के बाद महाजनी प्रथा के खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाने के लिे भी उन्हें आदिवासियों तथा मूलवासियों के बीच एक बड़ी शख्सियत के तौर पर स्थापित किया.
