रांचीः अपनी सुरक्षा को लेकर तल्ख तेवर दिखाने वाले और सरकार के अंदर कथित मतभेद को लेकर तमाम किस्म की चर्चाओं के बीच राधाकृष्ण किशोर ने वित्त सचिव को पत्र लिखकर वित्तीय वर्ष 2026 27 के बजट का अनुरूप राज्य की राजस्व प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
पत्र में राज्य के आंतरिक संसाधनों को बढ़ाने केंद्रीय अनुदान की प्राप्ति में तेजी लाने के साथ ही कहा है कि राजस्व प्राप्ति के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के सेवानिवृत दक्ष और विभिन्न परीक्षित्रों के विशेष साड़ियों की टीम गठित कर राज्य के आंतरिक स्रोतों से सोकर और गैर सोकर राजस्व बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सुझाव आमंत्रित किएं जाएं, ताकि केंद्र सरकार पर हमारी निर्भरता कम हो.
पत्र में कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के 1,58,560 करोड़ रुपये के बजट के सामने राजस्व की स्थिति चिंताजनक है. कुल 1,36,210.04 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के खिलाफ स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.
वित्त मंत्री ने कहा है कि केंद्र की नीतियों- जीएसटी युक्तिकरण और वीबी- रामजी योजना के चलते राज्य पर 6000 से 8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है.
जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाले 18273 566 करोड रुपए के वार्षिक अनुदान लक्ष्य के विरुद्ध 7 जुलाई तक केवल 126 करोड रुपए प्राप्त हुए हैं जो लक्ष्य का महत्व 0.69 प्रतिशत है राजस्व प्राप्ति में वृद्धि की आवश्यकता क्यों देखते हुए राज्य को आम लोगों पर अतिरिक्त कर लगाए बिना राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता है.
खनन और परिवहन विभाग का एकीकरण
वित्त मंत्री ने राज्य में चल रहे मालवाहक वाहनों की जांच पर सवाल उठाया है. इसके साथ ही कहा है कि अगर खनन विभाग और परिवहन विभाग का एकीकरण कर दिया जाए, तो अवैध रूप से चल रहे वाहनों और राजस्व की चोरी पर नकेल कसी जा सकती है. यह केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाने में अहम साबित होगा.
उन्होंने कहा है कि झारखंड में विभिन्न कंपनियों के पास पिछले 25-30 वर्षों से लगभग 20 मिलियन टन ‘फाइंस आयरन ओर’ डंप पड़ा है.यदि राज्य सरकार इसके लिए बिक्री परमिट और जीएसटी चालान जारी कर दे, तो राज्य के खजाने में हजारों करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हो सकती है.
