हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम की जर्सी के रंग को बदलने को लेकर पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा द्वारा उठाए गए सवाल पर सफाई पेश की है.
हॉकी इंडिया ने बताया है कि मैदान और जर्सी का रंग एक जैसा होने से खिलाड़ियों के खेल और दृश्यता पर असर पड़ रहा था.
गौरतलब है कि सोमवार को हॉकी इंडिया ने एफआईएच विश्व कप से पहले भारतीय टीम की नई जर्सी को लॉन्च किया.
जर्सी का रंग नीले से बदलकर ऑरेंज कर दिया गया है और इसके साथ ही जर्सी के डिजाइन में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। इसको लेकर ही पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने नाराजगी जाहिर की थी.
पूर्व कप्तान और ओलंपियन वीरेन रस्किन्हा ने इस फैसले का विरोध करते हुए दशकों पुरानी खेल परंपरा को छोड़ने के पीछे की वजह पर सवाल उठाया.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैं मानता हूं कि हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी के लिए कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन यह शर्मनाक है. भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीली रही है. मैंने कई वर्षों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है. प्रशंसक भी भारतीय टीम को नीली जर्सी में देखना चाहते हैं. आखिर नारंगी रंग का तर्क क्या है?”
पुरुष हॉकी टीम के एक और पूर्व कप्तान परगट सिंह ने भी खेल पर विचारधारा थोपने के आरोप लगाए.
परगट सिंह के सवाल
पुरुष हॉकी टीम के एक और पूर्व कप्तान परगट सिंह ने भी खेल पर विचारधारा थोपने के आरोप लगाए.परगट सिंह पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं. जालंधर कैंट से कांग्रेस के विधायक हैं. परगट सिंह पंजाब के पूर्व शिक्षा और खेल मंत्री रहे हैं.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “दशकों से हॉकी इंडिया की टीम गर्व के साथ नीली जर्सी पहनती रही है, और यह रंग हमारी खेल पहचान का हिस्सा बन चुका है. इसे केसरिया रंग में बदलना भारतीय जनता पार्टी सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें हर जगह अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश दिखाई देती है.”
जबकि हॉकी इंडिया का कहना है,, “इस बात को ध्यान में रखते हुए कोच और खिलाड़ियों ने पीले या ऑरेंज जैसे दूसरे रंग के सुझाव दिये. ध्यान से सोचने के बाद ऑरेंज को फाइनल किया गया. तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के अलावा, ऑरेंज हमारे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में से एक होने के नाते भी बहुत अहमियत रखता है, जो हिम्मत, कुर्बानी और देश के गर्व का प्रतीक है.”
