देश के कई राज्यों में इंफ्ल्यूएन्जा ए एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) और एच3एन2 सीजनल इंफ्ल्यूएन्जा के बढ़ते मामलों को देखते हुए झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक ने सभी सिविल सर्जन और जिला सर्विलेंस पदाधिकारियों को संभावित मरीजों की पहचान, जांच, उपचार और लगातार निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
भारत सरकार के अपर सचिव डॉ राकेश गुप्ता ने 22 अगस्त को सात बिंदुओं वाली एडवाइजरी झारखंड सरकार को भेजी थी.
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिलों में निगरानी और स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, एडवाइजरी के अनुसार फिलहाल झारखंड में इंफ्ल्यूएन्जा संक्रमण के बड़े पैमाने पर मामले सामने नहीं आए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जनों के साथ ऑनलाइन बैठक कर अस्पतालों में बेड, दवाओं, जांच और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है.
मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के लिए कम से कम एक बेड का पृथक आइसोलेशन वार्ड चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है. अस्पतालों में पीपीई किट, एन-95 और ट्रिपल लेयर मास्क, वीटीएम किट, जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन उपकरण और वेंटिलेटर उपलब्ध रखने को कहा गया है.
एहतियात बरतने पर जोर
संभावित मरीजों को मास्क लगाने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढंकने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने और हाथों की स्वच्छता बनाए रखने को कहा गया है. आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने तथा सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकने की सलाह दी गई है. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं लेने का भी निर्देश दिया गया है.
स्क्रीनिंग हो सकेंगी
जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में आईएलआई और एसएआरआई मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी. सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती, डायरिया और ठंड लगने जैसे लक्षणों वाले मरीजों पर विशेष नजर रखी जाएगी. सांस लेने में परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों को एसएआरआई श्रेणी में निगरानी में रखा जाएगा. डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों को मास्क लगाने का निर्देश दिया गया है.
रिम्स और एमजीएम में जांच की सुविधा
इंफ्ल्यूएन्जा ए एच1एन1 और एच3एन2 की प्रयोगशाला जांच की सुविधा रिम्स, रांची और एमजीएम, जमशेदपुर में उपलब्ध है. जिलों को मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के साथ समन्वय कर संदिग्ध मरीजों की जांच कराने को कहा गया है.
अस्पतालों में आइसोलेशन बेड
मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के लिए कम से कम एक बेड का पृथक आइसोलेशन वार्ड चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है. अस्पतालों में पीपीई किट, एन-95 और ट्रिपल लेयर मास्क, वीटीएम किट, जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन उपकरण और वेंटिलेटर उपलब्ध रखने को कहा गया है.
पोर्टल पर दर्ज करनी होगी रिपोर्ट
जिला सर्विलेंस इकाइयां आईएलआई और एसएआरआई के मामलों के बढ़ते ट्रेंड पर नजर रखेंगी. इंफ्ल्यूएन्जा जांच की दैनिक रिपोर्ट आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा है.
