दलित आरक्षण पर बिहार की दो पार्टी और लोजपा (आर) और हम आमने-सामने हो गई है. लोजपा आर के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री ने केंद्रीय कैबिनेट में अपने सहयोगी जीतन राम मांझी और उनके बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन से इस्तीफा मांगा है. इस्तीफा मांगे जाने के बाद संतोष सुमन की भी प्रतिक्रिया सामने आई है.
दलित आरक्षण में क्रीमी लेयर के मुद्दे पर यह राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं. साथ ही इस मुद्दे पर एनडीए में तनातनी साफ दिखाई पड़ रही है.
लोजपा (आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग ने शनिवार को कहा कि हिंदुस्तान अवामी मोर्चा दलित आरक्षण में सब कैटेगराइजेशन (उप-वर्गीकरण) की बात कर रही है, तो सबसे पहले जीतन राम मांझी खुद और उनके बेटे मंत्री पद छोड़ें।
चिराग पासवान ने शनिवार को पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि अनुसूचित वर्ग की सभी जातियां एकजुट हैं, तभी ताकत बनी हुई है. अगर इसमें बंटवारा हुआ तो आरक्षण समाप्त हो जाएगा. उन्होंने कहा कि जब दलित और महादलित का बंटवारा करने की कोशिश हुई थी तब भी उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी.
क्रीमी लेयर के खिलाफ चिराग
चिराग ने एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर को संविधान के विरुद्ध बताया. उन्होंने कहा कि दलितों को सामाजिक और छुआछूत के आधार पर मिला हुआ है. संविधान में कहीं नहीं लिखा है या आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए.
चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर पलटवार करते हुए कहा अगर वह चाहते हैं कि आरक्षण में क्रीमी लेयर होनी चाहिए तो सबसे पहले वह खुद इस्तीफा दें. उनके बेटे भी बिहार सरकार में मंत्री पद छोड़ें. फिर सदन के पटल पर इस पर चर्चा करवाएं. संविधान बदलता है तो सदन में चर्चा होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि अगर एससी आरक्षण में सब कोटा क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट आ गया तो सामाजिक न्याय की लड़ाई के मायने खत्म हो
संतोष सुमन ने समीक्षा की बात कही थी
गौरतलब है कि एक दिन पहले पहले केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग की थी. संतोष हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री हैं.
उन्होंने कहा कि वह एससी-एसटी आरक्षण में कैटेगराइजेशन लागू करने के पक्ष में है. इसका मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं है, बल्कि आरक्षण का लाभ किस समुदाय तक कितना पहुंच इसका मूल्यांकन होना चाहिए. संतोष सुमन ने कहा कि बिहार में एससी में आज भी कई जातियां है, जो अत्यधिक पिछड़ी हुई हैं उन्होंने दावा किया कि दलित आरक्षण का लाभ पासवान और रविदास जैसे कुछ एक जातीय तक सीमित ह.। जबकि अन्य जातियां भी बहुत पीछे हैं. मुसहरक समाज से एक भी आईएस नहीं बन पाया है
केंद्र सरकार का रुख
गौरतलब है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया है कि एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं होता. संविधान में कोई ऐसा प्रावधान नहीं है. क्रीमी लेयर की अवधारणा सिर्फ ओबीसी आरक्षण से जुड़ी हुई है. दरअसल सर्वोच्च अदालत में जनहित याचिका दायर कर कमजोर लोगो को नौकरी और दाखिला में प्राथमिकत देने की मांग की गई थी.
इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से अपना रूप स्पष्ट करने को कहा था. केंद्र का हलफनामा आने के बाद इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है.
संतोष सुमन का जवाब, पहले चिराग इस्तीफा दें
अब हम के चीफ संतोष कुमार सुमन ने चिराग पासवान को जवाब दिया है.
बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने एक्स पर लंबा पोस्ट कर चिराग पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले चिराग को इस्तीफा देना होगा.
एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “आरक्षण विरोधी कौन, सबसे पीछे खड़े लोगों का हक मांगने वाला या उनका हक रोकने वाला जहां तक इस्तीफे का सवाल है, तो हम तैयार हैं. मेरे छोटे भाई की पार्टी बड़ी है, उनके पास हमसे अधिक संख्याबल है. और राजनीतिक रूप से तीसरी पीढ़ी भी है—तो शुरुआत वही करें. वे इस्तीफा देकर सामने आएं, हम भी उनके साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं। लेकिन मेरे छोटे भाई, पहले मेरी बात को ठीक से समझिए. मैंने अपने एक्स पोस्ट और बयान में कहीं भी क्रीमी लेयर की बात नहीं की है. मैंने न SC/ST आरक्षण समाप्त करने की बात कही है और न ही क्रीमी लेयर के आधार पर किसी को आरक्षण से बाहर करने की बात कही है.”
