रांचीः झारखंड सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया है कि दो महीने में झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियिक्ति प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने की संभावना है.
सरकार के जवाब पर कोर्ट ने कोर्ट ने 18 नवंबर तक सरकार को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 19 नवंबर निर्धारित की है.
गुरुवार को इस मामले में हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की. सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय एवं विभोर मयंक ने कोर्ट बताया कि दो माह में जेपीएससी अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लिए जाने की संभावना है.
झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई.
कोर्ट ने टाइमलाइन मांगा था
गौरतलब है कि पइचले तीन सितंबर को इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि जेपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया कब तक शुरू की जाएगी और इसे कब तक पूरा कर लिया जाएगा.
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के महाधिवक्ता से पूछा कि पूर्व में दिए गए निर्देश के बाद नियुक्ति से संबंधित जवाब अब तक क्यों दाखिल नहीं किया गया.
अदालत ने सरकार को इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल कर स्पष्ट समयावधि बताने के साथ अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर तय की थी.
तब महाधिवक्ता ने अदालत से समय मांगते हुए कहा कि वह संबंधित अधिकारी से आवश्यक निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करेंगे.
इसी सिलसिले में आज (गुरुवार) को महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नियुक्ति की प्रक्रिया दो महीने में पूरी हो जाने की संभावना है.
स्वतः संज्ञान से दर्ज मामला
यह मामला राज्य में वन विभाग के रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट के स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका से जुड़ा है.
पिछली सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया था कि असिस्टेंट कंजरवेटर आफ फारेस्ट और रेंज फारेस्ट आफिसर के पदों पर नियुक्ति के लिए मुख्य परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और उसका परिणाम भी जारी हो गया है. शारीरिक दक्षता परीक्षा की तिथि भी निर्धारित की जा चुकी है. लेकिन आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफा देने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. इस मामले में सीआइडी जांच भी चल रही है, जिसका असर नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ रहा है. अदालत को यह भी बताया गया कि वन विभाग में की जा रही संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया को राज्य सरकार ने रद कर दिया है.
