भारत की महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पस स्क्वायर में खेले गए फाइनल में कठिन हालात में गोल्ड मेडल जीतकर इचिहास रच दिया है.
शुक्रवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत की महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने 10 बार की चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से शिकस्त दी है. महिला रिकर्व आर्चरी टीम का एशियन गेम्स इतिहास में यह पहला गोल्ड है.
जबकि तीरंदाजी में भारतीय खिलाड़ियों ने और टीमों ने दमदार खेल एशियन गेम्स में दिखाया है. आर्चरी में भारत ने एक ब्रॉन्ज और 3 गोल्ड मेडल पहले ही जीत लिए थे.
इसके अलावा खास बात यह रही कि भारत ने मौजूदा विश्व चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराया है, जिसके पास पहले से 10 ओलंपिक गोल्ड मेडल हैं.
भारतीय टीम में शामिल कुमकुम मोहोद, अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा ने धैर्य के साथ साहसिक खेल का प्रदर्शन किया. भारत की इस जीत पर बधाइयों का तांता लगा है.
दरअसल, अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोद की तिकड़ी की सटीक निशानों के बदौलत भारत ने एशियाई खेलों के मंच पर अपनी बादशाहत कायम की है.
फाइनल की स्टार रहीं 17 साल की कुमकुम
भारतीय टीम में शामिल कुमकुम मोहोद, अंकिता भक्त और कीर्ति शर्मा ने धैर्य के साथ साहसिक खेल का प्रदर्शन किया.
कुमकुम मोहोद फाइनल की स्टार रहीं, जिन्होंने दबाव में भी कमाल का संयम दिखाया.
17 साल की इस खिलाड़ी ने बार-बार जरूरी 10 पॉइंट बनाए. भारत को जब भी पॉइंट की जरूरत थी, कुमकुम ने अपने शॉट से पॉइंट हासिल किया. इसमें उनका वह अहम शॉट भी शामिल है, जिससे गोल्ड मेडल पक्का हुआ.
अंकिता भक्त ने कीमती अनुभव और लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि कीर्ति पर फाइनल के दौरान दबाव के पल आए. लेकिन तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर देश के लिए सोना जीत लिया. भारत ने इससे पहले सेमीफाइनल में चीन को 5-1 से हराकर पहली बार रिकर्व टीम के फाइनल में जगह बनाई थी.

अंकिता ने झारखंड का मान बढ़ाया
इस शानदार और स्वर्णिम उपलब्धि हासिल करने के लिए भारतीय टीम में शामिल अंकिता भकत जमशेदपुर स्थित टाटा आर्चरी अकादमी (TAA) की स्टार तीरंदाज हैं.
मूल रूप से सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंकिता ने महज 10 वर्ष की उम्र में तीरदांजी की दुनिया में कदम रखा और लगातार खुद को निखारा.
उनके असाधारण हुनर को देखते हुए साल 2014 में जमशेदपुर स्थित देश की प्रतिष्ठित ‘टाटा आर्चरी अकादमी’ (TAA) में उनका चयन हुआ. जमशेदपुर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोचों के मार्गदर्शन और विश्वस्तरीय सुविधाओं ने अंकिता की प्रतिभा को निखारा, जिसके दम पर उन्होंने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता के झंडे गाड़े हैं.
अंकिता भगत की इस शानदार कामयाबी और भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद लौहनगरी जमशेदपुर समेत पूरे राज्य में खेल प्रेमियों और प्रशासकों और कोचके बीच खुशी की लहर है.
कीर्ति का जलवा, देश हुआ कायल
मूल तौर पर हरियाणा की रहने वालीं कीर्ति भी झारखंड स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र पदमा, हजारीबाग की प्रतिभाशाली खिलाड़ी है.
कीर्ति की इस सफलता से एसटीसी पदमा में खुशी का माहौल है. संस्थान के प्रशिक्षकों और प्रशिक्षुओं ने उन्हें जीत की बधाई देते हुए प्रसन्नता जतायी है.
कीर्ति के पिता उद्धम सिंह पदमा संस्थान में कोच के रूप में कार्यरत हैं. बेटी की सफलता पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी नहीं हो सकती कि उसकी संतान देश के लिए गौरव हासिल करे.
उन्होंने बताया कि वर्षों की उनकी मेहनत को बेटी ने सफल कर दिया. कीर्ति ने साल 2022 में अपने पिता के मार्गदर्शन में भारतीय खेल प्राधिकरण प्रशिक्षण केंद्र पदमा, हजारीबाग में प्रवेश लिया था.
निरंतर अभ्यास, अनुशासन और बेहतर प्रदर्शन के दम पर कीर्ति ने राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनायी है. विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका उल्लेखनीय प्रदर्शन रहा है
