रांचीः ईडी रांची ने जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी के मामले में जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उसके बेटे राज जायसवाल को पीएमएलए , 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा है.
ईडी की तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि सिंडिकेट ने 135 शेल कंपनियों का एक जाल बनाया था, जो सिर्फ़ कागज़ों पर मौजूद थीं और जिनका इस्तेमाल बिना किसी असल सामान या सर्विस की सप्लाई के पांच हजार करोड़ रुपये से ज़्यादा के फ़र्ज़ी इनवॉइस जारी करने के लिए किया जाता था.
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इस तरीके से सिंडिकेट ने धोखाधड़ी करके 734 करोड़ रुपये से ज़्यादा का फ़र्ज़ी ITC बनाया और आगे पास किया.
54.33 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां खरीदी
जांच में पता चला है कि बैंक खातों में भेजी गई 54.33 करोड़ की राशि जांच के अनुसार, ज्ञान चंद जायसवाल और राज जायसवाल इस फर्जीवाड़े के मुख्य लाभार्थियों में शामिल थे. इन्होंने अपने और अपने परिजनों के नाम पर मेसर्स मां शारदा एंडेवर प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केदारनाथ ट्रेक्सिम प्राइवेट लिमिटेड अपने कर्मचारियों के नाम पर जय भोले एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियां बनाई थीं.
इन कंपनियों के माध्यम से 54.33 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी आईटीसी घुमाया गया और बाद में यह पैसा उनके तथा उनके रिश्तेदारों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया. इस पैसे का इस्तेमाल चल-अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया.
जमशेदपुर और कालकाता में छापेमारी
गिरफ्तारी से पहले ईडी ने 30 सितंबर को ज्ञान चंद जायसवाल, संजय पारख और अन्य से जुड़े जमशेदपुर (झारखंड) तथा कोलकाता (पश्चिम बंगाल) के चार ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए. इन जब्ती के बाद जायसवाल पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया गया.
इससे पहले भी मई-जून महीने में कोलकाता, जमशेदपुर और रांची के ठिकानों पर की गई कार्रवाई में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और करीब 70 लाख रुपये नकद और बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए थे. साथ ही 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों के लिए दो प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए हैं.
