रांचीः निहायत साधारण परिवार की रानू देवी और उनकी बेटी आरती की जिंदगी में शनिवार, 10 अक्टूबर का दिन एक ऐसे गौरान्वित करने वाले अवसर से जुड़ गया, जिसकी सराहना हर कोई कर रहा है.
देश के नामी इंजीनियरिंग संस्थान बीआईटी मेसरा में रानू देवी ने 26 वर्षों तक सफाई का काम कर अपने परिवार को संभाला, उसी संस्थान से बेटी ने इंजीनियरिंग में पीएचडी हासिल की. 10 अक्टूबर को एक समारोह में आरती ने यह उपाधि हासिल की, तो मां की छाती भी गर्व से चौड़ी होती रही.
बीआईटी मेसरा के दीक्षांत समारोह में मिली यह उपलब्धि आरती की मेहनत और लगन के साथ मां रानू देवी के वर्षों के संघर्ष का एक अनमोल हिस्सा बन गया है.
रांची के तुरुप गांव की रहने वाली रानू देवी ने 26 वर्षों पहले बीआईटी मेसरा में साफ-सफाई का काम पकड़ा था. पति की मौत के बाद जिंदगी की राह और कठिन हुई. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने परिवार का भरण-पोषण किया और बच्चों की पढ़ाई जारी रखी.
एमटेक और पीएचडी
आरती कुमारी तीन भाई-बहनों में मझली हैं. आर्थिक कठिनाइयों के बीच उनकी उच्च शिक्षा में बीआईटी मेसरा और सरकार की ओर से मिली छात्रवृत्ति ने मदद की.
आरती ने आरटीसी से बीटेक और बीआईटी मेसरा से एमटेक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद शोध कार्य करते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की.
आरती अपने गांव तुरुप की पहली महिला हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है.
15 हजार रुपये पगार
रानू देवी ने जब बीआईटी मेसरा में काम शुरू किया था, तब उन्हें सप्ताह में 400 रुपये मिलते थे. वर्तमान में उनका वेतन 15 हजार रुपये प्रतिमाह है.
पति के निधन के बाद तीन बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी अकेले निभाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था. सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी.
छात्रवृत्ति से पूरी की उच्च शिक्षा
आरती कुमारी तीन भाई-बहनों में मझली हैं. आर्थिक कठिनाइयों के बीच उनकी उच्च शिक्षा में बीआईटी मेसरा और सरकार की ओर से मिली छात्रवृत्ति ने मदद की.
आरती ने आरटीसी से बीटेक और बीआईटी मेसरा से एमटेक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद शोध कार्य करते हुए उन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की.
आरती अपने गांव तुरुप की पहली महिला हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है.
