झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल 23 परीक्षाओं के विज्ञापन को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक बरकरार रखा है.
सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत में प्रार्थियों और राज्य सरकार का पक्ष सुना.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अधिसूचना पर रोक को अगले आदेश तक बरकरार रखा. है. मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को 11:30 बजे से होगी.
एसआईटी जांच के मामले में मॉनिटर नियुक्त
अदालत ने कहा कि सिर्फ एक अधिसूचना से सरकार विभिन्न विभागों में नियुक्त हो चुके अभ्यार्थियों को बिना प्नकृतिक न्याय (नेचुरल जस्टिस) का पालन किये सेवा से नहीं हटा सकती.
अदालत ने सीआईडी की एसआईटी जांच के मामले में मॉनिटर नियुक्त किया है.
नियुक्त अभ्यर्थियों की किसी तरह की परेशानियों के समाधान की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी रिटायर जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को दी गई है.
अदालत ने कहा है कि अगर एसआईटी किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशान करती है, तो वे जस्टिस गौतम चौधरी के पास अपनी शिकायत कर सकते हैं.
उल्लेखनीय है कि मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने आरोप लगाया कि सीआईडी जांच के नाम पर निर्दोषों को नोटिस जारी कर परेशान किया जा रहा है. जांच के दौरान जब उम्मीदवार जांच अधिकारी से यह कहता है कि उन्हें इस मामले में कुछ नहीं कहना, तो उन्हें अनुचित परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि वह निर्दोषों को प्रताड़ित होने से बचाए.
इन आरोपों पर सरकार की ओर से महाधिवक्ता और मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि जांच अधिकारी को अगर लगता है कि किसी को पूछताछ के लिए बुलाया जाए, तो वह उसे समन कर बुला सकता है. उसे किसी को समन करने से नहीं रोका जा सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को इस बात की आशंका है कि जांच के दौरान किसी को प्रताड़ित किया जा सकता है, तो इसकी मोनिटरिंग हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत न्यायाधीश से करायी जा सकती है. इसके बाद कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस गौतम चौधरी को मॉनिटर नियुक्त किया.
दोनों पक्षों ने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार की ओर से मामले में शपथ पत्र दायर किया गया, जिस पर प्रति उत्तर दायर करने के लिए प्रार्थियों की ओर से समय देने का आग्रह किया गया, जिसे अदालत में स्वीकार कर लिया.
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा व महाधिवक्ता रोहित्सय राय ने पक्ष रखा, जबकि प्रार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पटवालिया, पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स एवं अन्य ने पैरवी की.
गौरतलब है कि प्रार्थी आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य की ओर से अलग-अलग याचिका दायर कर राज्य सरकार की योजना को चुनौती दी गई है.
