रांचीः झारखंड के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और अखिल कुमार की अदालत ने हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद एक महिला के साथ हिरासत में कथित यौन शोषण के गंभीर आरोपों और आपराधिक मामले में बरी होने के बाद भी उसे लगातार हिरासत में रखे जाने पर सख्त रुख अख्तियार किया है.
खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड के गृह सचिव को पांच अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है.
अदालत ने सवाल उठाया कि आपराधिक मामले में बरी होने के बाद भी पीड़िता को किस कानूनी अधिकार के तहत हिरासत में रखा गया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने हजारीबाग डालसा को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. इस मामले में हजारीबाग के एसपी से भी रिपोर्ट मांगी गई है.
सामाजिक कार्यकर्ता ने दाखिल की याचिका
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से हेबियस कार्पस याचिका दाखिल की गई है, जो जेल में बंद लोगों से जुड़े मामलों पर काम करते हैं.
याचिका में पीड़िता को अदालत के समक्ष पेश करने, उन्हें तत्काल रिहा करने और उनकी हिरासत की वैधता की न्यायिक जांच की मांग की गई है.
याचिका में एक पुलिस कांस्टेबल रंजीत महतो के खिलाफ पीड़िता की ओर से लगाए गए यौन शोषण के गंभीर आरोपों का भी उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस संबंध में शिकायत भी की गई है.
याचिका में पीड़िता को तत्काल रिहा करने, स्वतंत्र जांच कराने और मुआवजे की मांग की गई है. हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की जांच कराने का निर्देश दिया.
हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की जांच कराने का निर्देश दिया.
डालसा को भी जांच के निर्देश
अदालत ने झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथारिटी (झालसा) के सदस्य सचिव को हजारीबाग डालसा के सचिव और उनकी टीम के माध्यम से जांच कराने को कहा.
सदस्य सचिव ने वर्चुअल माध्यम से अदालत को बताया कि डालसा सचिव अपनी टीम के साथ डिटेंशन सेंटर पहुंचकर पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए जांच कर रहे हैं. जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश की जाएगी.
मामले में हाईकोर्ट ने हजारीबाग के एसपी को भी वर्चुअल माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया.
एसपी ने अदालत को बताया कि रंजीत महतो के खिलाफ लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच तत्काल शुरू की जाएगी.
उन्होंने यह भी कहा कि डिटेंशन सेंटर में पीड़िता की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.
पांच अक्टूबर को अगली सुनवाई
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की स्वतंत्रता को बिना कानूनी अधिकार के छीना नहीं जा सकता. पहली सुनवाई होने के कारण अदालत ने मामले को स्थगित करते हुए इसे 5 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया है. उस दिन डालसा और हजारीबाग एसपी की रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी.
