रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग में घोटाला दर घोटाला हो रहा है. कैग की गंभीर रिपोर्ट सामने आई है. नियमों की धज्जियां उड़ायी ज रहीं. इसलिए सरकार घोटाले की सीबीआई जांच कराए.
पार्टी ऑफिस में एक प्रेस कांफ्रेंस में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के ऑडिट में जो अनियमितताएं पकड़ में आई हैं, वे वह काफी सनसनीखेज हैं. जून 2022 में 55.58 करोड़ की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंसों का कोई उपयोगिता मूल्यांकन नहीं किया गया. सभी 206 एंबुलेंस एक वर्ष से अधिक समय तक नामकुम में निष्क्रिय अवस्था में पड़ी रहीं. इसका कोई लाभ जनता को नहीं मिला.
अब फिर से 2026 में अब फिर से 2026 में 237 नई कस्टमाइज्ड एंबुलेंसों की खरीद हेतु लगभग 80 करोड़ की नई निविदा जारी की गई है.
कैग रिपोर्ट गंभीर
उन्होंने कहा कि कैग रिपेार्ट में राज्य की एंबुलेंस व्यवस्था से संबंधित खरीद, उपयोग, तकनीकी मूल्यांकन एवं संपत्ति प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएँ उजागर हुई हैं.
वहीं, कॉर्पोरेशन के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर पाई गईं. दवाएं तो खरीदी गई परंतु वह मरीजों तक नहीं पहुंची.
उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड काल में ऑक्सीजन टैंक परियोजना में लगभग 24 करोड़ रूपये का खेल सामने आया है। अयोग्य कंपनी को करोड़ों का ठेका दिया गया.
चयनित कंपनी MDD Medical systems India Pvt Ltd आवश्यक 10 वर्षों के अनुभव की शर्त पूरी नहीं करती थी. कंपनी के पास मात्र 3 वर्षों का अनुभव था और उसने जरूरी सुरक्षा प्रमाणपत्र एवं नेटवर्क दस्तावेज भी जमा नहीं किए थे. बावजूद उसे तकनीकी रूप से योग्य घोषित कर करोड़ों का ठेका दे दिया गया.
कंसल्टेंट और नियम-कायदे
मरांडी ने कहा कि ताजा मामला स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार व लूट से जुड़ा हुआ है. JMHIDPCL (झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड) में जिस शैलेन्द्र श्रीवास्तव को कंसलटेंट बनाया गया है, उसमें नियम-कायदों की पूरी धज्जियां उड़ाई गई है.
झारखंड सरकार ने 2016 में नियम बनाया था कि किसी सेवानिवृत्त अधिकारी को 3 वर्षों तक का ही सेवा विस्तार दिया जा सकता है. बाद में 2022 में नियम बनाया गया कि तीन साल के बाद उस व्यक्ति की सेवा विस्तार होती है तो मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी है. दिलचस्प बात यह है कि इन नियमों के बावजूद बिना मुख्यमंत्री की स्वीकृति के ही 12 दिसंबर 2025 को शैलेंद्र श्रीवास्तव नामक व्यक्ति को चौथे वर्ष के लिए कंसलटेंट के रूप में नियुक्त कर दिया गया.
मरांडी ने आरोप लगाया कि शैलेंद्र श्रीवास्तव पांचवें वर्ष में भी उसी पद पर कार्यरत हैं. अधिकारियों की मिलीभगत से JMHIDPCL को लूट, कमीशनखोरी और टेंडर डकैती का अड्डा बना दिया गया है.
