रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखा है. इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग, झारखंड में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
बाबूलाल ने पत्र में बताया है कि धनबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा वर्ष 2019 में दर्ज मामले की जाँच से संबंधित प्रकाशित समाचार ने स्वास्थ्य योजनाओं की वित्तीय निगरानी और विभागीय नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं.
उन्होंने समाचार के हवाले से कहा है कि केंद्र से प्राप्त ₹11 करोड़ से अधिक की राशि में से लगभग ₹6.97 करोड़ के गबन का मामला सामने आया है. इसमें ₹4.16 करोड़ से अधिक की राशि आरोपी ब्लॉक अकाउंट मैनेजर तथा उसके परिजनों और परिचितों के खातों में हस्तांतरित किए जाने का उल्लेख है. इसलिए भुगतान की स्वीकृति, खातों के संचालन, व्यय के सत्यापन और निगरानी के लिए उत्तरदायी अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच आवश्यक है.
उन्होंने कहा है कि सेवाओं के लिए आवंटित धन का इस प्रकार निजी खातों में पहुँचना वित्तीय नियंत्रण और पर्यवेक्षण की गंभीर विफलता दर्शाता है। यह राशि जनता के उपचार, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए निर्धारित थी. उपयोग में व्यापक अनियमितताओं के आरोपों की भी समग्र जाँच आवश्यक है. उक्त राशि का अभिलेखों से सत्यापन करते हुए राज्य के सभी 24 जिलों में आवंटन, आहरण, भुगतान, खरीद और वास्तविक आपूर्ति की जाँच कराई जानी चाहिए.
जाँच के दायरे में शामिल किए जाएं
ब्लॉक अकाउंट मैनेजर, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रदान किए गए वित्तीय अधिकारों का वैधानिक आधार, बैंक खातों के संचालन की व्यवस्था और भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया जाँची जाए.
दवाओं एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद के मामले में अमानक दवाओं, अनुपयोगी अथवा खराब उपकरणों, वास्तविक आपूर्ति के बिना भुगतान और प्रचलित बाजार दरों से अधिक कीमत पर खरीद के आरोपों की जाँच की जाए.
सॉफ्टवेयर एवं सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाएँ – स्वास्थ्य प्रबंधन, ट्रैकिंग और भंडार प्रबंधन के लिए विकसित सॉफ्टवेयर एवं पोर्टलों पर हुए व्यय की जाँच की जाए. संबंधित कंपनियों के चयन, अनुबंध की शर्तों, कार्य की वास्तविक पूर्णता, उपयोगिता और रखरखाव के भुगतान का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण कराया जाए.
लेखापरीक्षा आपत्तियों पर कार्रवाई
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा महालेखाकार की रिपोर्टों में दर्ज असमायोजित अग्रिम, लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र, संदिग्ध भुगतान एवं वित्तीय नियमों के उल्लंघन संबंधी आपत्तियों की समीक्षा की जाए. साथ ही
वित्तीय अनियमितताओं, दवा आपूर्ति और उपकरणों की अनुपयोगिता से संबंधित विधानसभा प्रश्नों पर दिए गए उत्तरों का मूल अभिलेखों से मिलान कराया जाए.
सीबीआई जांच हो, ऑडिट भी कराया जाए
मरांडी की मांग है कि राज्य के सभी 24 जिलों में विगत दस वर्षों के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग के वित्तीय आवंटन, व्यय और खरीद की जाँच सीबीआई अथवा स्वतंत्र विशेष जाँच दल से कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ की जाए. साथ ही महालेखाकार के समक्ष विशेष लेखापरीक्षा का अनुरोध किया जाए तथा स्वतंत्र विशेषज्ञों से विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए। इसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के बैंक खातों, निजी खातों में हुए हस्तांतरण, खरीद अनुबंधों और वास्तविक आपूर्ति का परीक्षण शामिल हो।
बिल, वाउचर, बैंक डिटेल की जांच हो
मरांडी ने कहा है किसभी संबंधित बिल, वाउचर, बैंक विवरण, निविदा अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाणपत्र और डिजिटल लॉग तत्काल सुरक्षित किए जाएँ. डिजिटल अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियाँ तैयार कर उनके परिवर्तन अथवा नष्ट किए जाने की संभावना रोकी जाए.
इनके अलावा जाँच में संलिप्तता पाए जाने पर संबंधित सिविल सर्जन, चिकित्सा पदाधिकारी, जिला एवं प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, लेखा प्रबंधक तथा वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं अन्य लागू विधिक प्रावधानों के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई जाए. गबन की राशि की वसूली तथा विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए.
