चाईबासाः सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी दीपक ने सारंडा के जंगलों में जारी नक्सल विरोधी अभियान का जायजा लेने के बाद कहा है कि सारंडा को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सुरक्षाबलों के पास एक महीने का लक्ष्य है. हमारे जवान कठिन चुनौतियों के बीच इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे.
इसके साथ ही उन्होंने पोलित ब्यूरो मेंबर और एक करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा को सरेंडर करने की नसीहत दी. उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि उसका एनकाउंटर हो, क्योंकि वह इसी देश का नागरिक है. यदि वह एक माह के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो सुरक्षाबलों के हाथों मारा जायेगा.”
शनिवार को सारंडा के बीहड़ स्थित बालिबा कैंप पहुंचे सीआरपीएफ अधिकारी ने सुरक्षा व्यवस्था और नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान जायजा लिया. एसडीजी दीपक कुमार सीआरपीएफ बटालियन संख्या जी-193 के कैंप में लगभग दो घंटे तक रुके.
इस दौरान उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों से संवाद कर उनकी हौसला अफजाई की और उनकी समस्याओं को सुना. अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर उन्होंने नक्सल विरोधी अभियान के अगले चरण की रणनीति पर चर्चा की.
हेलीपैड पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पेशल डीजी ने कहा कि नक्सलियों की ओर से सरेंडर के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गयी है. आने वाले दिनों में जंगलों में सर्च ऑपरेशन और तेज किया जायेगा. सुरक्षाबल अब निर्णायक जंग के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
मौके पर आइजी साकेत कुमार, एसटीएफ आइजी अनूप बिरथरे, डीआइजी सतीश लिंडा, सीआरपीएफ डीआइजी विनोद कार्तिक, कमांडेंट ओमजी शुक्ला, द्वितीय कमान अधिकारी उमेश कुमार, एसपी अमित रेनू और मनोहरपुर डीएसपी जयदीप लकड़ा सहित कई अन्य पुलिस व सीआरपीएफ अधिकारी उपस्थित थे.
निरीक्षण के बाद वे बीएसएफ के हेलीकॉप्टर से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गये.
कोबरा के सात जवान बीमार
हेलीपेड पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान ही मलेरिया से पीड़ित कोबरा 205 बटालियन के जवान अनिल बिस्वाल अचानक बेहोश होकर गिर गये.
उन्हें साथी जवानों ने उठाकर एसडीजी के हेलीकॉप्टर पर चढ़ाया. जवानों ने बताया कि सात जवान बीमार हैं.
