रांचीः झारखंड हाईकोर्ट में JSSC- CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर झारखंड हाई कोर्ट का फैसला 6 नवंबर, शुक्रवार को आएगा. हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था.
कोर्ट ने इस नियुक्ति को रद्द किये जाने को चुनौती देने वाली आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की.
राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा था. कहा था कि JSSC – CGL परीक्षा को रद्द करने के पीछे इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार महत्वपूर्ण कारण है. परीक्षा के संचालन में कई पैमाने पर विफलता सामने आई है, क्योंकि जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने प्रश्न पत्र को लीक होने दिया.
वहीं प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा एवं अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया था कि JSSC – CGL का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से निष्पादित हो चुका है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि गलत और सही का फर्क किया जाए और सारी नियुक्ति क्रिमिनल प्रोस्कयूशन पर निर्धारित रहेगी, फिर इस मामले को दोबारा उठाकर नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है. यह कोर्ट की अवमानना है. सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में दिशा निर्देश भी दे दिया है. सरकार ने केवल आंदोलनकारी छात्रों को संतुष्ट करने के लिए JSSC – CGL की नियुक्ति रद्द की है. गौरतलब है कि, एजेंसी के माध्यम से अभ्यर्थियों को क्वेश्चन के उत्तर नेपाल एवं अन्य जगहों पर रटवाया गया. परीक्षा की पारदर्शिता कायम नहीं रह सकी. परीक्षा की नियुक्त प्रक्रिया को लेकर पब्लिक कॉन्फिडेंस कायम रहना जरूरी है, ऐसी में पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी था. अनुसंधान जारी है, अनुसंधान में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर पुख्ता सबूत मिले हैं, प्राप्त दस्तावेजो से परीक्षा में गड़बड़ी, अनियमितता और भ्रष्टाचार के साफ प्रमाण मिले हैं, जो यह साबित कर रहे हैं कि परीक्षा फेयर नहीं था. इसमें दोषी अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग- अलग करना कठिन है.
