रांचीः झारखंड प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष अभिलाष साहू को निलंबनमुक्त किए जाने के मामले में एक नया मोड़ आया है. पार्टी के प्रभारी के राजू ने इस फैसले पर हस्तेक्षप करते हुए प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को एक पत्र लिखा है. इसमें कहा है कि अभिलाष साहू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित जांच प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्राप्त होने तक उनके झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक दायित्व को स्थगित रखा जाना उचित होगा.
प्रभारी के राजू ने पत्र के जरिए स्पष्ट किया है कि अभिलाष साहू के विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित जांच प्रतिवेदन का परीक्षण अभी लंबित है, जिसके माध्यम से यह निर्धारित किया जाना है कि उनके द्वारा किए गए कृत्य तथा उनके लिए निर्धारित दंड के मध्य उचित अनुपात एवं न्यायसंगत है अथवा नहीं.
प्रभारी ने केशव महतो कमलेश से कहा है कि जानकारी मिली है कि आपके (प्रदेश अध्यक्ष) निर्देशानुसार पत्र संख्या 431/09/2026, दिनांक 14.09.2026 के माध्यम से अभिलाष साहू की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता तथा झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष पद पर बहाली संबंधी अधिसूचना जारी की गई है.
अनुशासन कमेटी पहले रिपोर्ट पेश करे
झारखंड कांग्रेस प्रभारी ने प्रदेश अध्यक्ष से दो टूक कहा है कि अनुशासन कमेटी को निर्देश दिए जाएं कि अभिलाष साहू के कथित वीडियो एवं उसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने में उनकी व्यक्तिगत भूमिका क्या है.

इसके अलावा अनुशासन कमेटी के द्वरा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में जो कुछ कहा है उसका विस्तृत परीक्षण करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे. साथ ही, साहू के सार्वजनिक आचरण एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से संबंधित तथ्यों को भी रिपोर्ट में समुचित रूप से शामिल किया जाए.
वायरल वीडियो को लेकर कार्रवाई
गौरतलब है कि पिछले जुलाई महीने में रांची-हजारीबाग एनएच के इरबा के पास सड़क जाम के दौरान कथित तौर पर वायरल हुए एक वीडियो को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने अभिलाष साहू के साथ को-ऑर्डिनेटर अमरेंद्र सिंह को भी 29 अगस्त को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया था. निलंबन मुक्त किए जाने के बाबत सुनीत शर्मा ने 14 सितंबर को पत्र जारी किया था. यानी पंद्रह दिनों के दौरान ही अनुशासनात्मक कार्रवाई का पटाक्षेप कर दिया गया. निलंबन वापस लिये जाने के बाद कांग्रेस भवन में कार्यकर्ताओं ने अभिलाष साहू का स्वागत किया. एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जतायी.
वीडियो के बाद स्पष्टीकरण
इससे पहले 27 जुलाई को झारखंड प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन कमेटी के चेयरमैन डॉ रामेश्वर उरांव ने अभिलाष साहू और अमरेंद्र सिंह के नाम एक स्पष्टीकरण पत्र जारी किया था. इसमें एक खास समुदाय के संबंध में आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग किये जाने के आरोप से जुड़े कथित वीडियों को लेकर तीन दिनों में जवाब देने को कहा था.
अंदरखाने की राजनीति
इधर पंद्रह दिनों में ही अभिलाष साहू का निलंबन वापस लिए जाने के बाद पार्टी के गलियारे में कई किस्म की चर्चा है. माना जा रहा है कि प्रभारी के राजू नियमों और प्रक्रिया के तहत ही कोई कदम उठाना चाहते हैं. इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष ने निलंबन मुक्त कर दिया.
कांग्रेस के गलियारे में इसकी भी चर्चा है कि साहू और अमरेंद्र सिंह को सस्पेंड किए जाने के मामले में भी अंदरूनी गुटबाजी वजह बनी. कथित वीडियो के वायरल होने के बाद एक गुट के लोगों ने इसे हवा देने की कोशिशें की. दरअसल साहू का नाम बोर्ड निगम के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर रहा है. और कांग्रेस में बोर्ड-निगम को लेकर ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली हालत बनी है. वह इसलिए कि कांग्रेस के कई नेताओं का बोर्ड-निगम में कार्यकाल पूरा हो चुका है. फिलहाल जाने-अनजाने बने कथित वीडियो को लेकर साहू की मुश्किलें बरकरार है, पर उन्हें एक कुशल सांगठनिक पदाधिकारी भी माना जाता है.
हालांकि अभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बोर्ड-निगम के गठन को लेकर प्रत्यक्ष तौर पर कोई दिलचस्पी जाहिर नहीं की है. पिछली दफा भी बोर्ड-निगम के मामले में कांग्रेस ही लाभ की स्थिति में रही थी. हेमंत बारीकी से सबकुछ परख रहे हैं कि बोर्ड-ृनिगम का गठन हो तो झामुमो के नेताओं को भी प्राथमिकता में जगह मिले.
