रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल को पत्र लिखकर न्यायपालिका के प्रति दोहरे मापदंड अपनाने और प्रतिकूल फैसलों पर सर्वोच्च न्यायालय की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने को लेकर निशाना साधा है.
इसके साथ ही मरांडी ने 21 फरवरी 2024 को भेजे अपने पुराने पत्र की याद दिलाते हुए सिब्बल को आईना दिखाया और उनसे जवाब मांगा.
मरांडी ने पत्र में कहा कि सिब्बल की वरिष्ठता और विधिक अनुभव का वे सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी हैसियत संविधान और सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी नहीं हो सकती. जब फैसला अनुकूल आता है, तो न्यायिक व्यवस्था सही लगती है, लेकिन प्रतिकूल स्थिति में अदालत के निर्णयों में राजनीति दिखायी देने लगती है. यह विरोधाभास समझ से परे है कि सर्वोच्च न्यायालय पर भरोसा खोने का दावा करने के बाद भी वे वहीं उपस्थित होकर दलीलें पेश करते हैं.
मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के साथ पॉडकास्ट में सिब्बल ने उनके खिलाफ चार पीएमएलए मामले होने का निराधार दावा किया था, जबकि वे सभी मामले जनांदोलनों से जुड़े थे और अदालत में धराशायी हो चुके हैं. उन्होंने हेमंत सरकार द्वारा एससी/एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक विरोधियों को फंसाने की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किये.
नेता प्रतिपक्ष ने झारखंड सरकार के गैरकानूनी निर्णयों को बचाने के लिए सिब्बल द्वारा की जा रही महंगी पैरवी और राज्य के खजाने से ली जाने वाली भारी-भरकम फीस को लेकर भी घेरा. उन्होंने पूछा कि जनवरी 2020 से अब तक सरकार से उन्हें फीस और चार्टर्ड प्लेन के मद में कितनी राशि मिली है, जिसका उपयोग गरीबों की कॉलोनियां बनाने में हो सकता था.
मरांडी ने सिब्बल को सलाह दी कि वे नेता, वकील या पॉडकास्टर में से अपनी भूमिका स्पष्ट करें और असहमति सहने की परिपक्वता दिखायें.
