रांचीः पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की 10 दिनों के दौरान हुई मौत से लोग हैरान हैं. रविवार को सरकार के वित्त मंत्री इलाजरत पीड़ित परिवार से मिलने रिम्स पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों को समुचित इलाज के निर्देश भी दिए. इस बीच इलाज के दौरान देर रात कुलदीप महतो के पुत्र नकुल महतो की भी मौत हो गई.
यह परिवार में पांचवी मौत है. इससे पहले कुलदीप महतो की पुत्रवधू श्वेता देवी का मौत हो गई थी.
रिम्स में क्रिटिकल केयर के डॉक्टरों का कहना है कि लक्षण के आधार पर एपिडेमिक ड्रॉप्सी (दूषित सरसों तेल से होने वाली बीमारी) की आशंका है. लेकिन जांच रिपोर्ट का इंतजार है. रिम्स ने श्वेता देवी के शव का पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया है, ताकि मौत के सही कारणों की जानकारी हासिल हो सके.
हालांकि इलाज के दौरान चिकित्सकों ने पाया है कि बीमार पड़ने वालों के सबसे पहले पैर फूल रहे हैं. फिर तेजी से शरीर खून की कमी हो रही है. किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है.
ओझा-गुनी के चक्कर में
गांव के लोगों ने बताया है कि यह परिवार ओझा-गुनी पर विश्वास करता था. छह महीने पहले परिवार के एक सदस्य के बीमार पड़ने पर परिवार के लोग ओझा के पास गए थे. वहां उसने भभूत दिया और कहा कि इसे खाने पर ठीकत हो जाएगी. इसके बाद परिवार के सदस्य बीमार पड़ने पर घर में रखे सरसों तेल में भभूत मिलाकर खाते थे. आशंका है कि इसी भभूत खाने से सभी लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी.
इस बीच परिवार के मुखिया नकुल महतो की 19 जून को तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई. इसके अगले दिन बबिता कुमारी की मौत हुई. फिर 26 जून को नाबालिग पुत्री इंदु कुमारी की मौत हुई. इसके बाद बाकी सदस्यों को स्थानीय सीएचसी ले जाया गया, जहां से रिम्स रेफर किया गया. रिम्स में भर्ती होने के बाद चौथी सदस्य श्वेता देवी की मौत हुई.
जानकारी के मुताबिक 19 जून की मध्य रात्रि में कुलदीप महतो और 20 जून को सुबह बेटी बबीता कुमारी की मौत की सूचना के बाद से स्वास्थ्य विभाग की टीम सिक्का गांव गई थी.
लेकिन मृतक के अन्य चार पीड़ित परिवार घर पर नहीं मिले थे. जिसे बाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा चैनपुर से रेस्क्यू कर एमएमसीएच में भर्ती कराया गया था. लेकिन सभी पीड़ित सदस्य अस्पताल से भाग गए थे.
