रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों और पेयजल स्वच्छता विभाग के इंजीनियरों से कहा है कि राज्य में जल जीवन मिशन को गति देने के साथ भूगर्भ जल के संरक्षण तथा वर्षा के पानी के संचयन को लेकर दीर्घकालीन योजना बनाएं.
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन की राज्य में धीमी गति पर चिंता जतायी.
दिसंबर 2028 तक का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाते हुए राज्य के प्रत्येक घर में पाइपलाइन एवं नल के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दिसंबर 2028 तक के लक्ष्य को हासिल करें. साथ ही जल संकट की संभावना वाले क्षेत्रों की विशेष निगरानी रखी जाए, जहां भी पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है उन क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां त्वरित कार्रवाई कर आम जनों को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्रों में शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना चाहिए.
वाट्सएप ग्रुप पर मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से निर्माणाधीन योजनाओं की कार्य प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि बड़ी योजनाओं के निर्माण मे लगी एजेंसी अथवा ठेकेदार का वाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रतिदिन की कार्य प्रगति को अपडेट करें और निरंतर इसकी मॉनिटरिंग करें.
जल संरक्षण पर जोर
उन्होंने राज्य में जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के संवर्द्धन पर भी विशेष जोर दिया. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण तथा भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की जाएं. साथ ही लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया.
मुख्यमंत्री ने भू-जल स्तर गिरने के कारण अनुपयोगी हो चुके चापाकलों के बोरिंग का उपयोग रिचार्ज पीट के रूप में करने का निर्देश दिया, ताकि वर्षा जल का संचयन कर भू-जल स्तर को बढ़ाया जा सके. उन्होंने शॉक पीट बनवाने के लिए भी लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया.
बैठक में राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद के अलावा मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबू इमरान, अतिरिक्त सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग शशि रंजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.
