रांचीः रांची पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने ओरमांझी स्थित तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड में छापेमारी कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें बिहार में राजद के पूर्व एमएलसी सुबोध राय के अलावा उनके चालक देवेंद्र भगत और प्लांट के एक अन्य कर्मी रविकांत राय शामिल हैं.
शराब की यह फैक्ट्री सुबोध राय की है. तीनों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया है. साथ ही बॉलिंग प्लांट को सील कर दिया गया है.
इस प्लांट में दो वर्ष पूर्व भी उत्पाद विभाग ने छापामारी की थी. इस दौरान इसे सील भी किया था. सुबोध राय को राजद प्रमुख लालू प्रसद यादव का करीबी माना जाता है.
आरोप है कि प्लांट में तैयार शराब पर दूसरे नामी ब्रांड के फर्जी लेबल लगाकर इसे बजार में आधे दाम पर खपाया जा रहा था. छापेमारी दल का नेतृत्व सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह कर रहे थे. छापेमारी देर रात 12 बजे की गई और सुबह छह बजे तक चली.
तीन अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब बना रहे थे
छापेमारी में पता चला कि इस प्लांट में तीन अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब बनाई जा रही थी. इनमें 8 पीएम और आफ्टर डार्क ब्रांड की शराब शामिल हैं.
उत्पाद विभाग के एक अदिकारी ने बताया है कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इसे उत्तर प्रदेश और दिल्ली का लेबल लगाकर बेचा जा रहा था. शराब की बोतल पर फॉर सेल ओनली उत्तर प्रदेश लिखा था. इसलिए अवैध रूप से अन्य राज्यों में बिक्री की आशंका है.
छापे के दौरान किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर की 70 पेटी (प्रत्येक पेटी में 24 कैन), आफ्टर डार्क ब्लू- 218 पेटी (प्रत्येक पेटी में 48 बोतलें) 8 पीएम- 7 पेटी (प्रत्येक पेटी में 48 बोतलें) के अलावा
रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की- 78 पेटी जब्त की गई है. इनमें कई ब्रांड पर फॉर सेल इन उत्तर प्रदेश और फॉर सेल इन दिल्ली लिखा हुआ था.
बॉन्ड अफसर, फिर भी बन रही थी अवैध शराब
उत्पाद विभाग द्वारा प्लांट में बॉन्ड अफसर तैनात किया जाता है, जिसकी देखरेख में प्लांट में उत्पादन का कार्य होता है. ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि अधिकारी प्रतिनियुक्ति के बाद भी प्लांट में दूसरे ब्रांड के फर्जी लेबल लगाकर अवैध शराब कैसे बाहर बेची जा रही थी.
