रांची. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस पीके श्रीवास्तव की अदालत ने पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव को एनटीपीएस में हंगामे से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया है.
हजारीबाग के केरेडारी में वर्ष 2010 में एनटीपीसी कार्यालय के उद्घाटन के दौरान हुए हंगामे के मामले में पूर्व विधायक योगेंद्र साव के खिलाफ निचली अदालत और अपीलीय अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया. यह मामला 17 अगस्त 2010 का है.
एनटीपीसी के कोयला खनन प्रोजेक्ट में एक कार्यालय के उद्घाटन की तैयारी चल रही थी. हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त को उद्घाटन करना था. इसी दौरान योगेंद्र साव कुछ लोगों के साथ वहां पहुंचे.
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि उनके नेतृत्व में लोगों ने हंगामा किया, कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उद्घाटन स्थल पर लगे फूलों की सजावट को नुकसान पहुंचाया. इस मामले में केरेडारी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सात गवाहों के बयान दर्ज कराया था. निचली अदालत में योगेंद्र साव को भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए अलग-अलग धाराओं में 15 दिनों से लेकर 1 वर्ष की सजा सुनाई गई थी. बाद में अपीलीय अदालत में भी उनकी सजा बरकरार रखी थी.
दोष सिद्धि साक्ष्य के अनुरूप नहीं
उच्च अदालत ने इस मामले में इस पर भी ध्यान दिया कि प्राथमिकी में जिस व्यक्ति पर शिकायतकर्ता से मारपीट करने का आरोप था, उसे निचली अदालत में उसी साक्ष्य के आधार पर पर बरी कर दिया गया था.
इसके बावजूद योगेंद्र साव को दोषी ठहराया गया. हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत और अपीलीय अदालत में उपलब्ध साक्ष्य का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया और दोष सिद्धि साक्ष्यों के अनुरूप नहीं थे.
