पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य के एक अभूतपूर्व टकराव की ओर बढ़ने के बीच राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को बंगाल विधानसभा का भंग कर दिया है.
राज्यपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 की उपधारा (2) के खंड (b) से मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं 7 मई, 2026 से प्रभावी पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करता हूँ.”
विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिला है. बीजेपी को बहुमत हासिल होने के बाद ममता बनर्जी ने चुनाव में कथित वोट चोरी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. इससे नई सरकार गठन की प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी.
इस बीच राज्यपाल ने भारत के संविधान के आर्टिकल 174 की उपधारा (2) के खंड (b) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग करने का आदेश दिया है.
संविधान के अनुच्छेद 164(1) में कहा गया है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेंगे और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेंगे. मंत्री राज्यपाल की इच्छा तक पद पर बने रहेंगे.” इस प्रावधान को शाब्दिक रूप से पढ़ने पर ऐसा प्रतीत होता है कि राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री को पद से हटाने का अधिकार है.
बीजेपी दावा पेश करेगी
विधानसभा में स्पष्ट बहुमत के साथ चुनाव जीतने के बाद राज्यपाल के सामने सरकार गठन का दावा पेश कर सकती है. इससे पहले बीजेपी में विधायक दल का नेता का चयन होगा.
राज्यपाल के पास अनुच्छेद 164 के तहत राज्य में नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने और उसे शपथ दिलवाने की शक्ति होती है.
चुनाव में हारने वाली सरकार और सीएम की बर्खास्तगी के बाद राज्यपाल विधायक दल के नेता को मुख्यमंत्री चुन सकते हैं, जिसके बाद नई सरकार बन सकती है. यानी भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन वो जनादेश के बाद पश्चिम बंगाल की सीएम नहीं रह सकती हैं.
