सुप्रीम कोर्ट ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग के दौरान प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को रद्द करने की मंशा जताई है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह हज़ारों छात्रों के भविष्य का सवाल है.
पिछले महीने परीक्षा के पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में स्टूडेंट ने प्रदर्शन किए थे.
लाइव लॉ के मुताबिक़, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों का पिछला रिकॉर्ड रखने वाले और प्रदर्शनों में घुसपैठ करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज मामले रद्द नहीं किए जाएंगे.
सीजेआई ने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने की अदालत की मंशा भी दोहराई और संकेत दिया कि इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और एक पूर्व डीजीपी शामिल होंगे.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2,873 लोगों को छोड़कर, जिनके ख़िलाफ़ हत्या, रेप, अपहरण जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामले हैं, बाक़ी लोगों के ख़िलाफ़ मामले रद्द किए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारी स्टूडेंट के ख़िलाफ़ एफ़आईआर रद्द होनी चाहिए. यह कैसे किया जाए, माननीय न्यायाधीश तय कर सकते हैं. साथ ही प्रदर्शनों में घुसपैठ करने वाले असामाजिक तत्वों की जांच होनी चाहिए.”
