झारखंड ने ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (पीवीयूएनएल) की 800 मेगावाट क्षमता वाली दूसरी इकाई का वाणिज्यिक संचालन बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात से शुरू हो गया.
इससे झारखंड को अतिरिक्त 680 मेगावाट बिजली मिलेगी. इसके साथ ही झारखंड बिजली उत्पादन और उपलब्धता के मामले में न केवल आत्मनिर्भर बना है, बल्कि अधिशेष (सरप्लस) बिजली वाले राज्यों की श्रेणी में भी शामिल हो गया है.
पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एके सहगल ने यूनिट 2 के कमर्शियल ऑपरेशन (COD) की सफल घोषणा के साथ प्रसन्नता जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि पीवीयूएनएल ने झारखंड और देश की बिजली उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है.
पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड, एनटीपीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) का संयुक्त उपक्रम है.
इसमें एनटीपीसी की 74% और जेबीवीएनएल की 26% हिस्सेदारी है. परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना है.
राज्य को मिलेगी 680 मेगावाट अतिरिक्त बिजली
पीवीयूएनएल की नई 800 मेगावाट क्षमता वाली इकाई से उत्पादित बिजली का 85% हिस्सा, यानी 680 मेगावाट बिजली झारखंड को प्राप्त होगी. इससे पहले नवंबर 2025 में शुरू हुई पहली 800 मेगावाट इकाई से भी राज्य को 680 मेगावाट बिजली मिल रही है. दोनों इकाइयों के संचालन में आने के बाद केवल पतरातू परियोजना से ही झारखंड को 1,360 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी.
मांग से अधिक हुई बिजली उपलब्धता
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्तमान औसत बिजली मांग करीब 3,000 मेगावाट है. वहीं पतरातू परियोजना की दोनों इकाइयों समेत अन्य स्रोतों को मिलाकर अब झारखंड के पास लगभग 3,885 मेगावाट बिजली उपलब्ध है. इस तरह राज्य के पास अपनी जरूरत से करीब 600 मेगावाट अधिक बिजली मौजूद रहेगी.
