रांचीः राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की रांची में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई में आदिवासियों पर अत्याचार, जमीन विवाद, पेशन आदि के कई मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.
आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने बताया कि तीन दिवसीय सुनवाई के दौरान कुल 66 मामलों में से 15 मामलों का समाधान किया गया है. सर्कुलर रोड स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित इस सुनवाई में रांची जिला प्रशासन के डीसी, एसएसपी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.
बुकरू में जमीन कब्जा
आयोग की सदस्य ने बताया कि जमीन से संबंधित मिली अधिकांश शिकायतों में सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया गया है.
उन्होंने बताया है कि रांची जिले के बुकरु स्थित चामा गांव से संबंधित 06 मामलों में जबरन जमीन हस्तांतरण कराया गया है। आदिवासियों को डरा-धमकाकर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है. इस मामले में डीसी और एसएसपी को निर्देश दिया गया है कि आरोपितों के खिलाफ एफआईआई दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करें. साथ ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर आयोग को इसकी पूरी जानकारी दें.
उन्होंने यह भी बताया आयोग के निर्देश पर एक मामले में बुधनी देवी को पेंशन मिलना शुरू हो चुका है. वहीं, पशुपालन विभाग में कार्यरत अलका कच्छप को प्रोमोशन मिल चुका है।
हरमू अस्पताल भी जांच के घेरे में
राजधानी के वार्ड-26 स्थित हरमू अस्पताल मामले में उन्होंने डीसी को निर्देश देते हुए कहा कि जमीन से संबंधित आदिवासी परिवार की वंशावली को सीओ से सत्यापित कराएं. संबंधित जमीन पर रांची नगर निगम की ओर से G+2 आवासीय भवन का नक्शा स्वीकृत किया गया है, लेकिन हरमू अस्पताल का संचालन G+3 भवन में किया जा रहा है. स्वीकृत नक्शा में विचलन कर G+3 भवन का निर्माण कराया गया है.
शव थैले में रखने का मामला
वहीं, चाईबासा में एक आदिवासी परिवार की ओर से बच्चे का शव थैले में रखकर 60 किलोमीटर दूर लाया गया था। उन्हें समय पर एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाई थी. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि दोबारा इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो. एंबुलेंस की पर्याप्त सुविधा के लिए एनजीओ से एमओयू करें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी को एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके.
