पलामूः झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) 2026 की नियमावली से भोजपुरी, मगही, अंगिका भाषा को बाहर किए जाने पर बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री भानू प्रताप शाही ने सरकार और सत्ता रूढ़ दलों पर हमला बोला है.
उन्होंने पलामू प्रमंडल के सत्ताधारी दल के विधायकों और मंत्रियों से इस सवाल पर इस्तीफा मांगा है. साथ ही पूछा है कि सत्ता रूढ़ दलों में पलामू के नेता इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं.
गौरतलब है कि इस नियमावली में पलामू और गढ़वा जिलों के लिए स्थानीय भाषा के रूप में नागपुरी और कुडुख (उरांव) को शामिल किया गया है, जबकि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को बाहर रखा गया है. इस फैसले को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने नाराजगी जताई है.
हक छीना जा रहा और अपमान भी
भानु प्रताप शाही ने शुक्रवार को पलामू में मीडिया से बात करते हुए झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि इस फैसले से पलामू-गढ़वा के लोगों का अपमान किया जा रहा है. शाही ने दावा किया कि स्थानीय लोगों की भाषा छीनी जा रही है, स्थानीय लोगों को “बाहरी” करार देकर अपमानित किया जा रहा है.
उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के पास खतियान (भूमि दस्तावेज) नहीं है, लेकिन पलामू-गढ़वा के लोगों के पास खतियान है. उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार इन लोगों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों कर रही है.
