चाईबासाः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि जिस उद्देश्य के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमएफटी फंड बनाया था, चाईबासा जिले में उस फंड का कोई लाभ खदान प्रभावित इलाकों के लोगों को होता नहीं दिख रहा है. राज्य सरकार और प्रशासन के संरक्षण में इस फंड की केवल बंदरबांट और लूट हुई है.
चाईबासा बीजेपी कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में मरांडी ने कहा कि उन्होंने तीन दिनों तक इस इलाके का दौरा किया और विस्तारपूर्वक लोगों से जमीनी हकीकत समझने की कोशिश की परंतु जो तस्वीर और जानकारी सामने आई है वह काफी भयावह एवं पीड़ादायक है.
उन्होंने कहा, कोल्हान के इलाके में जो गरीबी और बेरोजगारी व्याप्त है, इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हेमंत सोरेन सरकार जिम्मेवार है. यहां उनके मंत्री और प्रशासन सहित तमाम लोग जनता की चिंता छोड़ अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए हैं.
श्वेत पत्र जारी हो
उन्होंने मांग रखी कि डीएमएफटी फंड को लेकर राज्य सरकार श्वेत पत्र जारी करे.
मरांडी ने कहा कि चाईबासा जिले में 10 वर्षों में 3742.15 करोड़ रूपया डीएमएफटी फंड में मिला है. आश्चर्यजनक बात यह है कि 78.68 प्रतिशत राशि खर्च होने के बाद भी प्रभावित इलाकों की बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं. हेमंत सोरेन सरकार ने इस फंड का पैसा यूं ही लूटा दिया है. यह एक प्रकार का आर्थिक अपराध है.
खदानों की नीलामी और पलायन
मरांडी ने कहा कि देश भर में 434 खदानों की नीलामी हुई है। वहीं झारखंड में मात्र तीन खदान का ही ऑक्शन हुआ है, वह ऑक्शन भी झारखंड सरकार ने नहीं बल्कि भारत सरकार के द्वारा हुआ है. झारखंड में एक भी खदान का ऑक्शन नहीं किया गया. राज्य सरकार बताए कि इसके लिए कौन जिम्मेवार है ? अगर झारखंड सरकार ऑक्शन करती तो यहां से युवाओं और मजदूरों का पलायन नहीं होता. अनेक खदानें नीलामी नहीं होने के कारण वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर समाप्त हो गए हैं.
